अनाज मंडी के कारोबारियों से एपीएमसी लेता है एक फीसदी मार्केट फीस, सुविधाओं पर आज तक एक पैसा नहीं किया खर्च
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लोडिंग-अनलोडिंग के लिए पॉइंट बनाने की नहीं हुई पहल अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी शिमला की अनाज मंडी गंज बाजार में बिकने के लिए बाहरी राज्यों से शिमला आने वाले खाद्यान्नों, दूध, दही और मक्खन पर एपीएमसी शिमला-किन्नौर एक फीसदी मार्केट फीस लेती है। हैरत इस बात की है कि एपीएमसी (एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमेटी) ने यह पैसा अभी तक शहर की अनाज मंडी को विकसित करने पर नहीं लगाया है।
मंडी में लोडिंग-अनलोडिंग के लिए पॉइंट बनाने की आज तक पहल नहीं हुई। ट्रेडर्स को अपना माल उतारने के लिए कोई निर्धारित जगह नहीं मिली है। इन्हें सामान उतारने के लिए रात का इंतजार करना पड़ता है। कार्ट रोड से गंज बाजार तक अपना सामान पहुंचाने के लिए उन्हें मशक्कत करनी पड़ती है और मजदूरों को मुंहमांगा रेट देना पड़ता है। शहर में ऐसे करीब 30 से 35 ट्रेडर्स हैं, जो इस फीस का भुगतान कर रहे हैं। कारोबारियों के बिल में बाकायदा एपीएमसी की फीस के रूप में इसे जोड़ा जाता है, जिसकी अदायगी आम ग्राहक से ही होती है। शहर के ट्रेडर्स हर माह एक से डेढ़ लाख रुपये मार्केट फीस के रूप में अदा करते हैं। पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल के चार वर्षों को छोड़कर कई सालों से यह फीस लगातार ली जा रही है, लेकिन इसका उपयोग शहर की अनाज मंडी के विकास पर नहीं हुआ। खाद्यान्नों में गेहूं, चावल, धान, मक्का, जौ और दालों में चना, राजमा, मसूर, मूंग, उड़द, अरहर आदि के अलावा सरसों, तिल, मूंगफली आदि अधिसूचित खाद्यान्नों पर मार्केट फीस ली जाती है। वहीं बाहरी राज्यों से आने वाले दूध, दही, पनीर जैसी जरूरी वस्तुओं पर भी मार्केट फीस ली जाती है।
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कारोबारियों का आरोप है कि इस मार्केट फीस का पैसा अनाज मंडी को विकसित करने में नहीं लगाया है। आज अनाज मंडी में जो भी सुविधाएं उपलब्ध हैं, वह नगर निगम की ओर से दी हैं। पीने के पानी, शौचालय और मंडी की मेटलिंग तथा रखरखाव का पूरा जिम्मा नगर निगम ही संभाल रहा है। मार्केट फीस से एपीएमसी ने शहर के भट्टाकुफर, पराला और ढली सब्जी मंडियों को बनाने का कार्य जरूर किया है, लेकिन अनाज मंडी को शिफ्ट करने की योजनाएं बनती रहीं। जगह देखने के लिए संयुक्त निरीक्षण किए जाते रहे और घोषणाएं भी होती रहीं, मगर जमीनी स्तर पर अलग अनाज मंडी बनाने की दिशा में कुछ नहीं हुआ।
व्यापार मंडल शिमला के अध्यक्ष संजीव ठाकुर, अनाज मंडी कारोबारी संघ के अध्यक्ष दीपक श्रीधर, उमेश कुठियाला और सुरेंद्र ठाकुर ने कहा कि मार्केट फीस की एवज में आज तक अनाज मंडी में एपीएमसी ने एक पैसा तक खर्च नहीं किया है। कारोबारी और ट्रेडर्स सिर्फ मार्केट फीस चुकाने वाले बनकर रह गए हैं। वह सालों से घोषणाओं के बाद अलग मंडी बनने का इंतजार कर रहे हैं।
मैहली में फोरलेन किनारे बनेगी नई अनाज मंडी : वर्मा
एपीएमसी शिमला-किन्नौर के चेयरमैन देवानंद वर्मा ने कहा कि जिला शिमला की पराला, भट्ठाकुफर और ढली मंडियों को बनाने तथा उनके रखरखाव का कार्य किया है। अनाज मंडी नगर निगम की भूमि और भवनों में चल रही है, इसलिए वहां पर पैसा लगाना मुश्किल होता है। अनाज मंडी को फोरलेन किनारे मैहली की तरफ शिफ्ट किए जाने की योजना पर कार्य किया जा रहा है। जल्द ही एपीएमसी शहर में अलग अनाज मंडी बनाने का कार्य करेगी। इसमें कारोबारियों के लिए बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध होंगी।