शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज (फाइल फोटो)
हिमाचल प्रदेश में दसवीं और जमा दो कक्षाओं में सेमेस्टर सिस्टम शुरू करना प्रदेश के लिए व्यावहारिक नहीं है। प्रदेश सरकार इस सिस्टम को लागू करने के पक्ष में नहीं है। नई दिल्ली में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक में भाग लेते हुए शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उच्च संस्थानों का विलय अथवा एकीकरण करना भी इस दिशा में व्यावहारिक समाधान नहीं है।
नई शिक्षा नीति के सुत्रीकरण के संबंध में मानव संसाधन विकास मंत्रालय भारत सरकार द्वारा गठित समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट पर बोलते हुए शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने प्रदेश के सुझावों से केंद्र को अवगत कराया। उन्होंने भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए वर्तमान आवश्यकताओं के आधार पर नई शिक्षा नीति का निर्माण करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने कहा कि ऐसी शिक्षा नीति तैयार करने की तत्काल आवश्यकता थी। क्योंकि ई वर्षों से शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए कुछ भी नहीं किया गया था। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीति गुणात्मक और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देकर एक जीवंत, निष्पक्ष और ज्ञानी समाज की स्थापना के उद्देश्य से एक केंद्रित राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली बनाने में मदद करेगी। शिक्षा मंत्री ने प्रस्तावित नीति के प्रत्येक पहलु पर अपने विचार व्यक्त किए।
उन्होंने राज्य विद्यालय नियामक प्राधिकरण, राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन, राष्ट्रीय समिति के लिए राष्ट्रीय एकीकृत व्यावसायिक शिक्षा व पांच वर्षों के भीतर उदार कला संस्थानों की स्थापना की भी सराहना की। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र पर सकल घरेलू उत्पाद पर 6 प्रतिशत खर्च करने के सुझाव के अतिरिक्त तीन स्तरीय भाषा और एक विदेशी भाषा फार्मूले को लागू करने की भी सराहना की। बैठक में प्रमुख सचिव शिक्षा केके पंत भी मौजूद रहे।