प्रदेश के विभिन्न सरकारी स्कूलों में तैनात 300 से अधिक पीटीए शिक्षकों को सात महीने से मानदेय नहीं मिल रहा है। शिक्षक मुफ्त में स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करने पर शिक्षा निदेशालय ने इनकी ग्रांट इन एड रोक दी है।
पीटीए अनुबंध अध्यापक संघ ने निदेशालय के अधिकारियों पर पुराने शिक्षकों पर नए नियम थोपने का आरोप लगाया है। संघ ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है।
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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पीटीए पर तैनात जिन शिक्षकों ने अभी तक बीएड नहीं की है, टेट पास नहीं किया है और जिन शिक्षकों के ग्रेजुएशन में 50 फीसदी से कम अंक हैं, उन्हें ग्रांट इन एड के तहत मिलने वाला मानदेय बंद कर दिया गया है।
न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करने वाले शिक्षा निदेशालय ने 16 अगस्त 2016 से ग्रांट बंद कर दी है। साल 2014 में गठित हाई पावर कमेटी ने साल 2010 से पूर्व नियुक्त किए गए पीटीए शिक्षकों को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी करने के लिए अगस्त 2016 तक का मौका दिया था।