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पीटीए शिक्षकों को नहीं मिल रहा मानदेय, शिक्षा निदेशालय ने रोका पैसा

Fri, 24 Mar 2017 10:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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प्रदेश के विभिन्न सरकारी स्कूलों में तैनात 300 से अधिक पीटीए शिक्षकों को सात महीने से मानदेय नहीं मिल रहा है। शिक्षक मुफ्त में स्कूलों में सेवाएं दे रहे हैं। न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करने पर शिक्षा निदेशालय ने इनकी ग्रांट इन एड रोक दी है।
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पीटीए अनुबंध अध्यापक संघ ने निदेशालय के अधिकारियों पर पुराने शिक्षकों पर नए नियम थोपने का आरोप लगाया है। संघ ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग उठाई है।

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प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पीटीए पर तैनात जिन शिक्षकों ने अभी तक बीएड नहीं की है, टेट पास नहीं किया है और जिन शिक्षकों के ग्रेजुएशन में 50 फीसदी से कम अंक हैं, उन्हें ग्रांट इन एड के तहत मिलने वाला मानदेय बंद कर दिया गया है।
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न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी नहीं करने वाले शिक्षा निदेशालय ने 16 अगस्त 2016 से ग्रांट बंद कर दी है। साल 2014 में गठित हाई पावर कमेटी ने साल 2010 से पूर्व नियुक्त किए गए पीटीए शिक्षकों को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता पूरी करने के लिए अगस्त 2016 तक का मौका दिया था।
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राज्य सरकार ने पीटीए के तहत रखे गए लेक्चरर के लिए शैक्षणिक योग्यता एमए और बीएड रखी है। इसके अलावा सीएंडवी शिक्षकों का शास्त्री में डिप्लोमा अनिवार्य है। साल 2014 में हुई हाई पावर कमेटी की बैठक में फैसला लेकर पीटीए शिक्षकों को प्रोफेशनल क्वालिफिकेशन पूरी करने के लिए दो साल का मौका दिया गया था। अगस्त 2016 में मोहलत पूरी हो गई थी।

उधर, पीटीए अनुबंध अध्यापक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विवेक मेहता का कहना है पीटीए शिक्षक साल 2006-07 में लगे थे। उस समय यह शिक्षक सभी तरह के नियमों को पूरा करते थे। नए नियम साल 2010 में आए हैं। इन्हें लागू साल 2012 में किया गया। ऐसे में पहले से लगे शिक्षकों पर नए नियम कैसे लागू किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा सात माह से मानदेय नहीं मिलने के चलते सैकड़ों शिक्षकों का मानसिक और आर्थिक तौर पर शोषण हो रहा है। उन्होंने शिक्षा निदेशालय से साल 2012 के बाद नियुक्त होने वाले शिक्षकों पर नए नियम लागू करने की मांग करते हुए पूर्व के नियुक्त शिक्षकों को नियमित करने की अपील की है। अध्यक्ष विवेक मेहता ने मुख्यमंत्री से शिक्षकों को शोषण से मुक्त करने की गुहार लगाई है।  
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