अखिल भारतीय अस्थायी अध्यापक महासंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया है कि शनिवार की कैबिनेट में पैट अध्यापकों को कोई राहत नहीं मिली है। यह महज चुनावी स्टंट है। चौदह साल से नियमितीकरण की टकटकी लगाए पैट शिक्षक खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
महासंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के अध्यक्ष सुनील चौहान और राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी चंदन नेगी ने कहा है कि पैट अध्यापक नियमितीकरण के सभी मापदंड पूरे करते हैं। इसके बावजूद उन्हें नियमित नहीं किया जा रहा है। पैट अध्यापकों को कैबिनेट में 10 कैजुअल लीव देने की बात हुई है, जो इन्हें 2003 से ही मिलती है, जबकि यह 12 होनी चाहिए थी।
कैबिनेट में पैट को मेडिकल लीव देने की बात की है, जो भी एक छलावा है। मेडिकल लीव उसे दी जाती है जिसे मेडिकल अलाउंस दिया जाता है, जबकि पैट को यह नहीं मिलता। उन्हें तो तय मानदेय ही दिया जाता है। कैबिनेट ने पैरा अध्यापकों को नियमित पे स्केल देने का प्रावधान किया है।
पैट और पैरा अध्यापकों की एक समान नीति के बावजूद पैट को आज भी तय वेतन पर रखा गया है और पैरा अध्यापकों को समान नीति होने के बावजूद नियमित पे स्केल देना तथा नियमित करना प्रदेश सरकार की दोहरी मानसिकता एवं राजनीति को दर्शाता है। कैबिनेट में पैट को वन टाइम स्थानांतरण नीति की बात हुई है। इस पर महासंघ कहता है कि यह लाभ पैरा अध्यापकों को दस साल पहले दिए गए थे।
आठ अगस्त को स्कूलों में नहीं पढ़ाएंगे खफा एसएमसी शिक्षक
अन्य शिक्षकों को कई लाभ देने और कैबिनेट बैठक में अपनी लंबित मांगों पर गौर नहीं करने से नाराज एसएमसी शिक्षक आठ अगस्त को स्कूलों में नहीं पढ़ाएंगे। इन दिन प्रदेश भर से सभी शिक्षक शिमला आएंगे और सीएम वीरभद्र सिंह के समक्ष उन्हें गुमराह कर रही अफसरशाही को बेनकाब करेंगे।
यह एलान पीरियड बेस एसएमसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल पितान, महासचिव मनोज रोंगटा, उपाध्यक्ष कमल जोशी, पवन नेगी, रोशन छिंटा, अंकित रामटा और जिला किन्नौर के प्रधान दीपक नेगी, प्रतिनिधि संदीप और अन्य शिक्षक नेताओं ने किया। कहा कि पीरियड बेस एसएमसी शिक्षकों को कैबिनेट बैठक से निराशा हाथ लगी है।
अब उनके सब्र का बांध टूट रहा है। शिक्षक नेताओं ने कहा कि मंत्रिमंडल बैठक पर उनकी भी नजरें थीं, मगर उन्हें उपेक्षित किया गया। कहा कि पांच अगस्त की मंत्रिमंडल बैठक में पीटीए, पैरा, पैट और कंप्यूटर अध्यापकों की ओर से सरकार को कई तरह के तोहफे दिए गए हैं, जबकि एसएमसी शिक्षकों के भर्ती नियम आरटीई अधिनियम के मुताबिक होने के बावजूद उनके साथ सौतेला व्यवहार किया गया है।
उन्होंने कहा कि 4000 एसएमसी शिक्षकों की तैनाती एसडीएम की ओर से की गई है। अधिकतर की नियुक्ति उन दुर्गम स्कूलों में हैं, जहां कई वर्षों से पद खाली चल रहे थे। आरोप लगाया कि विभाग के अधिकारी उनके बारे में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को गुमराह कर रहे हैं।
पांच साल से सेवाएं देने के बावजूद उनके लिए स्कूलों में अवकाश की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्हें 5850 रुपये के मानसिक मानदेय में भी काम करना पड़ रहा है। एसएमसी शिक्षकों के पद पर नियमित अध्यापकों को नीति बनाने को कहा गया था, मगर इस पर कोई काम नहीं हुआ।