विश्वभर में जाना माना कांगला ग्लेशियर इस बार ट्रैक्टरों के बिना सूना पड़ा है। आदमखोर के नाम से विख्यात इस ग्लेशियर पर ट्रैकिंग के दौरान हुई मौत के बाद कहीं ट्रैकर सहम तो नहीं गए। करीब आठ माह बाद कांगला ग्लेशियर की ओर खुले रास्ते से अभी तक एक भी विदेशी ट्रैक्टर नहीं पहुंचा है।
जानकारी के अनुसार करीब 26 किलोमीटर लंबे कांगला ग्लेशियर पर ट्रैकिंग करना विदेशी ट्रैक्टरों की पहली पसंद रहा है। लाहौल-स्पीति पुलिस प्रशासन की ओर से ट्रैक्टरों की सुरक्षा के लिए तिंगरेट में पुलिस की अस्थायी चौकी खोल दी है। हालांकि अभी तक तीन भारतीय ट्रैक्टरों के नाम पंजीकृत किए हैं।
बता दें कि मनाली से उदयपुर घाटी से होते हुए ट्रैक्टर कांगला ग्लेशियर होकर कारगिल के जंस्कर पहुंचते हैं। पुलिस की अस्थायी चौकी में पंजीकरण अनिवार्य किया गया है, जिससे आपदा के समय लाहौल पुलिस उनकी मदद के लिए आगे आ सके।
यहां ट्रैक करना भले ही रोमांच भरा हो। लेकिन कई ट्रैक्टर कांगला ग्लेशियर में अपनी जान भी गंवा चुके हैं। 24 सितंबर 2016 को कनाडा की 30 वर्षीय महिला ट्रैक्टर अन्ना समिथ, सितंबर 2017 को मुंबई के 60 वर्षीय विजय पारिक तथा सितंबर 2005 में चार ट्रैक्टरों की एक साथ मौत के बाद कांगला ग्लेशियर ट्रैकरों के लिए खतरनाक बन रहा है।
उधर, एसपी लाहौल-स्पीति राजेश धर्माणी ने कहा कि कांगला ग्लेशियर पर ट्रैकिंग करने वाले ट्रैक्टरों की सुरक्षा के लिए तिंगरेट के पास पुलिस सहायता कक्ष खोल दिया गया है, जहां ट्रैकिंग पर जाने वाले ट्रैक्टरों को अपना नाम व पता पंजीकरण करना अनिवार्य होगा