पक्ष रखने के साथ ही विवि के इन अधिकारियों ने कहा कि अन्य सरकारी संस्थानों से सर्विस टैक्स वसूलने का मामला अभी विचाराधीन है, उन पर जो फैसला होगा, उसी के मुताबिक विश्वविद्यालय फीस पर सर्विस टैक्स देने या न देने पर निर्णय लेगा।
विवि कुलपति प्रो. राजिंद्र सिंह चौहान और वित्त अधिकारी नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि विवि सिर्फ पांच सालों में संपत्ति से हुई आय पर करीब नौ लाख का टैक्स चुकाएगा।
विश्वविद्यालय को सालाना छात्रों से ली जाने वाली परीक्षा, रजिस्ट्रेशन, माइग्रेशन, एफिलिएशन सहित अन्य फीस और सेल्फ फाइनांसिंग कोर्स की फीस के रूप में करीब 20 करोड़ की आय होती है, जबकि 25 करोड़ तक विवि छात्रों पर व्यय करता है।
विवि की संपत्ति जैसे दुकानों आदि से होने वाली आय पर अप्रैल 2017 से लागू जीएसटी में करीब 18 फीसदी टैक्स अदा करने को विवि दुकानदारों के साथ दोबारा से नए सिरे से एमओयू साइन करेगा। किराये में ही जीएसटी को जोड़ दिया जाएगा, जिससे संपत्ति का किराया बढ़ना तय है।