इसमें पीडब्ल्यूडी के तकनीकी सहायकों की मदद ली जा रही है। फोरेंसिक लैब शिमला के निदेशक अरुण शर्मा ने बताया कि जब तक जांच एजेंसी को जरूरत न हो, तब तक न तो टीम को बुलाया जाता है और न टीम जाती है।
खास बात यह है कि इतने बड़े हादसे में भी फोरेंसिक विशेषज्ञों को नहीं बुलाया गया, जबकि बद्दी और अन्य जगह कई ऐसे छोटे हादसे हुए हैं, जिनमें विशेषज्ञ रिपोर्ट के लिए फोरेंसिक एक्सपर्ट को बुलाया गया। उन मामलों में उन्होंने घटना को बाकायदा री क्रीएट किया और फिर उसके बाद अपनी रिपोर्ट सौंपकर कारण स्पष्ट किए।