नाइजीरिया में सुमद्री लुटेरों के चंगुल से छूटने के बाद शनिवार को कांगड़ा जिले के तीनों युवकों की आखिरकार वतन वापसी हो गई। अपने अन्य दो साथियों के साथ दिल्ली पहुंचे अजय की परिवार वालों से पूरे एक महीने के बाद फोन पर बात हुई। इससे पहले अजय की 14 मार्च को अपने परिवार वालों से फोन पर बात हुई थी।
अजय की आवाज सुनकर परिवार वालों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। अजय और उनके दोनों साथी रविवार को दिल्ली से हिमाचल अपने घर पहुंचेंगे। इससे परिवार वालों में खुशी का माहौल है।
अजय की माता कमला ने बताया कि बच्चों के बंधक बनाए जाने की बात पता लगते ही परिवार वालों ने रातें जाग-जाग कर काटी हैं कि कब क्या फोन आ जाए और क्या सुनेंगे। फोन की घंटी बजने पर ही उनको डर लगने लगता था।
इसी बीच अजय के पिता को ब्रेन हैम्रेज का भी अटैक आया, जिससे परिवार और मुश्किल में फंस गया था, लेकिन अब वह ठीक हैं। बहन आशा का कहना है कि अजय की रिहाई के लिए उन्होंने हर समय मां चामुंडा के सामने ही पूजा-अर्चना की है।
उन्हें मां चामुंडा पर पूरा विश्वास था कि उनका भाई सकुशल देश लौटेगा। इसके लिए उन्होंने मां से मन्नत मांगी थी। इसे पूरा करने के लिए वह भाई और परिवार के साथ माता चामुंडा के मंदिर जाएंगे।
नाइजीरिया में समुद्री लुटेरों ने नगरोटा सूरियां की पंचायत सुकनाड़ा के सुशील कुमार, पालमपुर के अजय कुमार और नगरोटा बगवां की उस्तेहड़ पंचायत के रड गांव के पंकज को बंधक बना लिया था।
तीनों मर्चेंट नेवी में कार्यरत थे। उन्हें छोड़ने की एवज में लुटेरों ने 11 मिलियन नायरा करेंसी के रूप में फिरौती मांगी थी। परिवार वालों से लुटेरों ने सेटेलाइट कॉल के जरिये फोन पर बात भी करवाई थी।