...ये नन्ही परी हमारे लिए देवी के समान है, हम इसे भी अपने बच्चे की तरह पालेंगे। कमला नेहरू अस्पताल में अपना बच्चा बदल जाने के बाद भी बिलासपुर के मजबूर परिजन अस्पताल की ओर से दी गई बेटी को पालन को तैयार हैं। वे इस बच्ची को भी अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं और इसका पालन पोषण अपने बच्चे की तरह ही कर रहे हैं।
‘अमर उजाला’ से बातचीत के दौरान पिता अनिल ने बताया कि उन्हें अंदेशा है कि उनकी पत्नी की डिलीवरी से सात मिनट पहले हुई डिलीवरी में पैदा हुए बच्चे को उनके बच्चे के साथ बदला गया है। जो बच्ची बदलकर हमें दी गई है, उसकी शक्ल उसकी दादी से मिलती है, उन्होंने दादी को अस्पताल में देखा था।
बीते तीन महीनों से वह भारी परेशानी झेल रहे हैं। घर पर हर रोज खाना तो बनता है लेकिन बाहर फेंकना पड़ता है। बच्चा पैदा होने के बाद जब यह बताया गया कि बेटा हुआ है और बाद में बेटी सौंप दी गई तब से शुरू हुआ परेशानी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। डीएनए टेस्ट की हर रिपोर्ट हमारे लिए परीक्षा साबित हुई है।
टेस्ट पर हजारों खर्च करने पड़े हैं। लेकिन हमें जो बच्ची मिली है उसके पालन पोषण में हम कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। अनिल ने बताया कि बच्चे बदलने की घटना के बाद उन्होंने उस परिवार से बात करने की कोशिश की थी जिनके पास बेटा है, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसलिए अब अपने बच्चे को हासिल करने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।