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नई राहें नई मंजिलें से विकसित होंगे ये पर्यटन स्थल, 50 करोड़ का बजट

Mon, 24 Sep 2018 06:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि राज्य सरकार ने नई राहें नई मंजिलें योजना के तहत तीन स्थानों का चयन किया है। मंडी जिले के जंजैहली, शिमला के चांशल और कांगड़ा के बीड़ बिलिंग को इस योजना के तहत पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जाएगा। सोमवार को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने इस योजना के लिए 50 करोड़ रुपये का बजट रखा है।

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मारकंडा मंदिर और अंबिका माता मंदिर में सामुदायिक हॉल के अलावा जंजैहली, शटाधार, कुथाह, शिकारी माता मंदिर आदि में लगभग 2.70 करोड़ रुपये की लागत से सौर ऊर्जा प्लांट स्थापित किए जाएंगे। क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जंजैहली, थुनाग शिकारी देवी, पुडा केदार, तुंगासी टॉप, थाची आदि स्थानों के आसपास जंगल में ट्रैकिंग रास्तों पर अस्थायी टेंट लगाए जाएंगे। इससे साहसिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

सीएम ने कहा कि पर्यटकों को सुविधा के लिए जंजैहली सर्किट में 40 नए ट्रैकिंग मार्गों को भी विकसित किया जाएगा। 12 वन विश्राम हटों का पर्यटकों की सुविधा के लिए स्तरोनयन किया जाएगा। क्षेत्र के विकास व पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए कुल 16.70 करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी। एशियाई विकास बैंक के वित्त पोषण से 25.17 करोड़ रुपये की लागत से पर्यटक संस्कृति केंद्र को विकसित किया जाएगा।

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चांशल में 15.12 करोड़ रुपये खर्च होंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि शिमला जिले के चांशल में 15.12 करोड़ रुपये खर्च होंगे। क्षेत्र में साहसिक खेलों, स्कीइंग और कैंपिंग की अपार संभावनाएं हैं। केंद्रीय सड़क एवं भूतल परिवहन मंत्रालय ने चांशल क्षेत्र को पर्यटक हब के रूप में विकसित करने के लिए मैसर्स मैकिंसे को रिपोर्ट तैयार करने के लिए नियुक्त किया है। कांगड़ा जिले में बीड़ बिलिंग पर नई राहें नई मंजिलें योजना के तहत 14.62 करोड़ रुपये से विकसित किया जाएगा।

केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना के तहत बीड़ बिलिंग में 8.07 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एक पैराग्लाडिंग संस्थान स्थापित किया जा रहा है।
अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यटन राम सुभग सिंह ने कहा कि पर्यटन की दृष्टि से अनछुए स्थलों को देश के पर्यटन मानचित्र पर लाया जाएगा। निजी उद्यमियों को इन क्षेत्रों में पर्यटन परियोजनाओं में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

मुख्य सचिव विनीत चौधरी, अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव डा. श्रीकांत बाल्दी, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त अनिल कुमार खाची, अतिरिक्त मुख्य सचिव, ऊर्जा तरुण कपूर, ऊर्जा विभाग के निदेशक मानसी सहाय, पर्यटन विभाग के निदेशक, राकेश कंवर, प्रधान मुख्य अरण्यपाल वन अजय कुमार, हिमाचल प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड प्रबंध निदेशक, जय प्रकाश काल्टा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

‘जल्द बनकर तैयार होंगे रज्जू मार्ग’

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार अधिक से अधिक रज्जू मार्ग स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। इच्छुक उद्यमियों को कई रियायतें देने का फैसला लिया है। पहले सात वर्षों के लिए वार्षिक लाइसेंस शुल्क में छूट दी जाएगी।

श्री आनंदपुर साहिब-श्री नैनादेवी जी रज्जू मार्ग के निर्माण के लिए राज्य सरकार तथा पंजाब सरकार से समझौता होगा। धर्मशाला- मैकलोडगंज रज्जू मार्ग का निर्माण 150 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है।

यह परियोजना अगले साल मई तक पूरी की जाएगी। पलचन-रोहतांग रज्जू मार्ग को वर्ष 2022 तक पूरा किया जाएगा। आदि हिमानी से चामुंडा और भुंतर से बिजली महादेव रज्जू मार्ग का निर्माण कार्य शीघ्र ही किया जाएगा।
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पर्यटकों के लिए विकसित होंगे जलाशय

मुख्यमंत्री ने कहा कि कई मानव निर्मित जलाशयों जैसे चमेरा,  पौंग बांध,  गोबिंदसागर,  तत्तापानी,  लारजी और पंडोह में साहसिक व जल खेलों के विकास की अपार संभावनाएं हैं। गोबिंदसागर झील को शिकारा, नौकायन, हाउस बोट, समुद्री विमानन और अन्य गतिविधियों के लिए विकसित किया जाएगा।

इसके लिए राज्य युवा सेवाएं और खेल विभाग इन गतिविधियों को निजी सहभागिता (पीपीपी मोड) पर विकसित करने के लिए कार्य करेगा। पौंग बांध को पक्षियों के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में विकसित किया जाएगा।

राज्य सरकार भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के साथ पंडोह बांध में जलक्रीड़ा और मनोरंजन गतिविधियों को अनुमति प्रदान करने का मामला उठाएगी। लारजी बांध में पर्यटकों की सुविधा के लिए आवश्यक अधोसंरचना विकसित कर आकर्षक पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।  
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