लिथोट्रीप्सी, एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीनें भी बदलेंगी
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए उपकरणों की आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज हो गई है। आईजीएमसी में सीटी स्कैन समेत एक्सरे और अन्य दस साल पुरानी अल्ट्रासाउंड मशीनों को जल्द बदला जाएगा।
नई सीटी स्कैन मशीन की स्थापना के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है और स्वीकृति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले साल तक यह मशीन आईजीएमसी में कार्य करना शुरू कर देगी। नई मशीन के आने से न केवल स्कैनिंग की संख्या बढ़ेगी बल्कि मरीजों को समय पर रिपोर्ट भी मिल पाएगी। शहर में आईजीएमसी ही एकमात्र ऐसा बड़ा सरकारी संस्थान है, जहां रोजाना सौ से अधिक मरीज सीटी स्कैन करवाने आते हैं। मौजूदा मशीन के पुराने और तकनीकी दिक्कतों के कारण कई बार मरीजों को प्राइवेट लैब में महंगे दामों पर जांच करवानी पड़ती है। इसी तरह आईजीएमसी में लिथोट्रीप्सी, एक्सरे और कई अल्ट्रासाउंड मशीनें भी 10 साल से ज्यादा पुरानी हैं। आईजीएमसी के चिकित्सा अधीक्षक राहुल राव ने बताया कि पुरानी मशीनों की सूची बनाकर सरकार को दी जा रही है। इन्हें जल्द बदला जाएगा।
नई एमआरआई मशीन भी जल्द होगी शुरू
आईजीएमसी में नई एमआरआई मशीन भी लगाई जा रही है। इसके लिए भवन निर्माण कार्य अस्पताल परिसर में चल रहा है। मशीन इंस्टॉल करने के लिए कमरे का निर्माण कार्य पूरा होते ही परीक्षण और तकनीकी फिटिंग की जाएगी। कुछ सप्ताह में यह सेवा शुरू होने की उम्मीद है। 24 करोड़ की लागत से नई मशीन स्थापित की जा रही है। नई एमआरआई सुविधा के शुरू होने से रीढ़, मस्तिष्क और अन्य जटिल रोगों की जांच आसान होगी। अभी मरीजों को एमआरआई के लिए तीन महीने तक इंतजार नहीं करना होगा।
पेट स्कैन मशीन सितंबर में होगी शुरू
आईजीएमसी में पहली बार पेट स्कैन मशीन भी स्थापित की जा रही है। इसके सितंबर तक शुरू होने की उम्मीद है। यह मशीन मुख्य रूप से कैंसर रोगियों के लिए कारगर साबित होगी। पेट स्कैन सेवा के शुरू होने से हिमाचल के कैंसर मरीजों को बाहर नहीं जाना पड़ेगा और सस्ती दरों पर उपचार संभव होगा। पेट स्कैन मशीन के लिए अस्पताल परिसर में तीन मंजिला ब्लॉक बन चुका है। इसपर 45.68 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। 21 करोड़ रुपये की लागत से पेट सीटी मशीन, 9 करोड़ की स्पेक्ट सीटी मशीन और शेष राशि भवन निर्माण पर खर्च की जा रही है।