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एक रुपये खर्चा जाएगा तो उससे अधिकतम रिटर्न लेंगे : खाची

Wed, 01 Jan 2020 01:29 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
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अनिल कुमार खाची - फोटो : अमर उजाला
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मूल रूप से शिमला के कुमारसैन के निवासी 1986 बैच के हिमाचल कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अनिल कुमार खाची को राज्य की अफसरशाही की बागडोर मिली। वित्तीय प्रबंधन में दक्ष माने जाने वाले खाची की काबिलियत और वरिष्ठता का सम्मान करते हुए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने उन पर भरोसा जताया है। सख्त मिजाज और अपने निर्णय पर मेरुदंड को एकदम सीधा रखने वाले नवनियुक्त मुख्य सचिव अनिल कुमार खाची से अमर उजाला के मुख्य संवाददाता सुरेश शांडिल्य ने मंगलवार को बातचीत की। पेश हैं कुछ अंश : 

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प्रश्न : आपकी प्राथमिकताएं क्या रहेंगी?  
उत्तर : मेरी प्राथमिकताएं सरकार की प्राथमिकताओं से अलग नहीं हो सकतीं। प्रशासन चुस्त-दुरुस्त रहे और जवाबदेह रहे। आम आदमी के लिए काम करे। जो भी हमारे कार्यक्रम हैं और परियोजनाएं हैं, वे अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें। हमारा शिकायत निवारण भी सही से चले। 
प्रश्न : जन शिकायत निवारण तो पुराना रट है? 
उत्तर : मैं तो यही कह रहा हूं, यह कम हो। आवश्यकता ही नहीं पड़े। प्रशासन तो वही होता है, जिसमें इसकी कम से कम जरूरत पड़े। अपने साथियों के साथ बैठूंगा। तभी रोडमैप बनेगा। 
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प्रश्न : बाल्दी साहब आप पर इन्वेस्टर मीट के बाद निवेश को धरातल पर लागू करने की बड़ी जिम्मेवारी छोड़ गए हैं, कैसे आगे बढ़ेंगे? 
उत्तर : यही तो हमने ग्राउंड करनी हैं। इसमें सबकी मदद से आगे बढ़ा जाएगा। यह प्रदेश हित में है। 
प्रश्न : राज्य पर 50 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है, आमदनी कोई नहीं? 
उत्तर : मैं बहुत स्पष्ट हूं कि संसाधनों को प्रदेश के विकास में लगाया जाएगा। ‘अ बैंग फॉर अ बक’ का फार्मूला अपनाया जाएगा। यानी एक रुपये खर्चा जाएगा तो उससे अधिकतम रिटर्न लेने का काम करना होगा। वित्तीय समस्या का कोई शॉर्ट टर्म समाधान नहीं। एकदम सबकुछ खत्म हो जाएगा, ऐसा नहीं हो सकता है।

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प्रश्न : बागवानी पृष्ठभूमि होने के नाते क्या प्राइमरी सेक्टर पर खास रहेगा? 
उत्तर : मैं बहुत स्पष्ट हूं कि एक ही क्षेत्र पर फोकस नहीं करूंगा। हमें बहुआयामी अप्रोच रखनी होगी। हर क्षेत्र में फोकस होगा।
प्रश्न : आप केंद्र सरकार में काम करने का भी तजुर्बा खूब है, वहां का अनुभव भी काम आएगा?
उत्तर : यह अनुभव काम करने और सोचने के नजरिये में काम आएगा। 
प्रश्न : आपको सख्त मिजाज का मानते हैं, अफसरशाही पर सख्ती करेंगे? 
उत्तर : वे सब मेरे साथी हैं। मुख्य सचिव टीम का कैप्टन होता है, उसे टीम को साथ रखना होता है। टीम साथ हो तो प्रगति है, बिछुडे़ हुए लोग हों तो समस्या होती है। देखिए, काम तो सही ही करूंगा। मिजाज जरूर बदल सकता हूं। (हंसते हुए) 33 साल में जो व्यक्तित्व बनता है, वह रातों-रात नहीं बदलता। राज्य के हित में रहूंगा। मेरा मिजाज कभी भी किसी को ठेस पहुंचाने का नहीं रहा है। मैं अपने सही निर्णयों पर अडिग रहता हूं। 
प्रश्न : निष्क्रिय अधिकारियों को कैसे लाइन पर लाएंगे। 
उत्तर : मैं अभी कोई थ्योरी नहीं बता पाऊंगा। सबको मोटिवेट करने का प्रयास रहेगा।
प्रश्न : आपने कभी सोचा था कि प्रदेश की अफसरशाही की कमान आपके हाथ होगी? 
उत्तर : 23 साल की उम्र में आया था तो सोचा ही था। इसी वजह से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मुझे योग्य और पात्र मानकर सम्मान दिया है। मैं 1986 में 23 साल की उम्र में ही आईएएस में आ गया था। उससे पहले अर्थशास्त्र में पीजी कर रहा था।  
प्रश्न : मूल रूप से रहने वाले कहां से हैं, शिक्षा-दीक्षा कहां हुई? 
उत्तर : शिमला के कुमारसैन से। शिक्षा-दीक्षा दिल्ली में हुई। डीपीएस आरकेपुरम नई दिल्ली में पढ़ाई हुई। आगे की पढ़ाई भी दिल्ली में की। मेरे पिता नीदरलैंड दूतावास में भारतीय स्टाफ के प्रमुख थे, माता गृहिणी रहीं। अब दोनों गांव में ही हैं। मेरी दो बेटियां दिल्ली में हैं।
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