जब आप विपक्ष में होते हैं और आपकी पार्टी के साथ जुड़े कर्मचारियों का दूरदराज तबादला कर दिया जाता है, तब उनको यही कहते हैं कि जब सरकार आएगी तब आपको एडजस्ट करेंगे। अभी आप किसी तरह अपना समय निकालिए, लेकिन जब सरकार आ जाती है तो अपनी जान बचाने के लिए आप जैसे कांग्रेस नेता ऐसे ही बयान देते हैं कि हम तबादलों के लिए विधायक या मंत्री नहीं बने हैं।
मुझे और हमारे कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को पता है कि पिछला भाजपा का राज कैसे झेला है। उन भाजपाइयों के तबादले हो रहे हैं, लेकिन अभी तक उनके नहीं हुए हैं जिन्होंने आपका चुनाव में साथ दिया था। नीरज ने पोस्ट में लिखा है कि कुर्सी की मजबूरी आपकी होगी, मेरी नहीं है। मुझे उम्मीद नहीं थी कि इस तरह का इंटरव्यू देकर आप मुझे ही नीचा दिखाएंगे।
यह लड़ाई सोशल मीडिया में मैं खुलेआम इसलिए लड़ रहा हूं कि ये कोई मेरी निजी लड़ाई नहीं है और न ही ये कोई संपत्ति की लड़ाई है। यह कांग्रेस के हजारों कार्यकर्ताओं की लड़ाई है। अगर आज की तारीख में जिन भाजपाइयों के वापसी तबादले हुए हैं, उनको रद्द नहीं किया तो चाहे अकेले ही सही खुलकर लडूंगा, आपके खिलाफ भी और आपकी सरकार के खिलाफ भी। फिलहाल आप अपनी मंत्री की कुर्सी का आनंद लीजिए। इस बारे जब मंत्री चंद्र कुमार से टेलीफोन पर संपर्क साधना चाहा तो कई बार रिंग जाने के बाद भी फोन नहीं उठाया।
मंत्री-विधायक ही सरकार से नाराज, आए दिन कर रहे इस्तीफे की बात : जयराम
शिमला। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री आए दिन विपक्ष पर सरकार न चलने देने का आरोप लगाते हैं, जबकि सरकार की हालत के जिम्मेदार वह खुद हैं। विकास विरोधी और भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाली उनकी नीति के कारण प्रदेश का बहुत नुकसान हो चुका है। ढाई साल के कार्यकाल में सरकार न सिर्फ जनता का ही नहीं, अपने नेताओं मंत्रियों और विधायकों का भी भरोसा खो चुकी है। जयराम ने कहा कि उनकी सरकार के सबसे युवा मंत्री हों या चाहे सबसे वरिष्ठ मंत्री वह बार-बार इस्तीफा देने की बात कर चुके हैं।
राजनीतिक विवशता के कारण भले ही उन्होंने अपने त्यागपत्र देने का विचार वापस ले लिया हो, लेकिन इससे सरकार की जमीनी हकीकत सामने आ चुकी है। मंत्री भले ही इस मामले में आज अपनी सफाई दे चुके हैं, लेकिन उनके पुत्र ने फिर से अपनी बात रखी है और सरकार को घेर रहे हैं। सरकार में होने के बाद भी कांग्रेस के छह विधायक और तीन निर्दलीय विधायक साथ छोड़ चुके हैं। इसका मतलब साफ है कि सरकार का नेतृत्व ही कमजोर है। सरकार में होने के बाद भी राज्यसभा का चुनाव हार चुके हैं। मुख्यमंत्री बीजेपी पर गुटबाजी का आरोप लगा रहे हैं, उन्हें अपनी जमीनी हकीकत देखनी चाहिए कि कांग्रेस कितने गुटों में बंटी है। मात्र ढाई साल के कार्यकाल में मुख्यमंत्री की लोकप्रियता न्यूनतम स्तर पर चली गई है।