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साहित्य पर शोध करने की आवश्यकता : शुक्ल

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शिमला। भारतीय साहित्य एवं विज्ञान पूरे विश्व का मार्गदर्शन करने की क्षमता रखता है जिस पर हमारे विद्वानों को शोध करने की आवश्यकता है। यह बात राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय संगोष्ठी के शुभारंभ पर कही। उन्होंने कहा कि भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान की स्थापना भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन ने एक ऐसे शोध केंद्र के रूप में की थी जिसमें देश-विदेश के विद्वान मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में उच्च शोध कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि सभी नागरिकों का दायित्व है कि हम भारत की सांस्कृतिक विरासत के संवर्द्धन में अपनी सहभागिता निभाएं। शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव डॉ. अतुल कोठारी ने आजादी से पूर्व और उसके बाद भारत की समृद्ध संस्कृति पर किए कुठारघात को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि 3000 साल पूर्व प्राचीन भारत के चहुंमुखी विकास बारे विदेशी प्रख्यात इतिहासकारों ने हैरतअंगेज तथ्य प्रस्तुत किए हैं। संस्थान के निदेशक प्रो. नागेश्वर राव ने संस्थान के बारे में जानकारी दी। इस मौके पर प्रो. डंबारूधन नाथ की लिखी पुस्तक निर्गणा भक्ति इन इस्टर्न इंडिया का भी विमोचन किया।
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