प्रति माह दो हजार रुपये रखरखाव के लिए अलग से विवि प्रबंधन को दिए जाएंगे। कंपनी जब पास्ता बाजार में उतारेगी तो उसके लेवल पर कंपनी के नाम के साथ ही नौणी विवि का नाम भी अंकित होगा।
कंपनी उत्पादों की पोषण प्रोफाइलिंग के साथ पैकेजिंग और लेवलिंग का कार्य भी करेगी। खर्च अधिक और आय कम होने का मामला चर्चा में आने के बाद इस डील से नौणी विवि कुछ हद तक राहत महसूस कर रहा है।
विवि के खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने पोस्ट हार्वेस्ट इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी पर ऑल इंडिया कोऑर्डिनेटेड रिसर्च प्रोजेक्ट के तहत इस पोषक तत्व युक्त पास्ता के दो उत्पाद विकसित किए हैं।
विश्वविद्यालय ने एक सर्वे किया है, जिसमें पाया गया कि युवा इंस्टेंट खाद्य पदार्थों के प्रति अधिक आकर्षित होते हैं। जो कभी-कभी पाचन से संबंधित बीमारियों का कारण भी बनते हैं।
छह वर्षों से अनुसंधान के दौरान नौणी विवि के वैज्ञानिकों ने कई परीक्षण किए। इसके बाद पौष्टिक पास्ता बनाया। विभाग ने उत्पादों के पायलट प्रोजेक्ट का परीक्षण किया। शिमला की एक कंपनी ने दोनों पास्ता में दिलचस्पी दिखाई।
विवि के कुलपति डॉ. एचसी शर्मा ने बताया कि एक कंपनी के साथ करार हुआ है। विवि का तैयार किया पास्ता बाजार में मिलने वाले मैदे के पास्ते की तुलना में पचाने में आसान होता है।