नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने प्रदेश सरकार से कुल्लू और मनाली में रजिस्टर टैक्सियों की संख्या उपलब्ध कराने को कहा है। ट्रिब्यूनल ने आदेश जारी कर सरकार को एफिडेविट के माध्यम से यह जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।
ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष न्यायाधीश स्वतंत्र कुमार ने सरकार से कहा है कि वह तीन दिन के अंदर जांच व सत्यापन के बाद मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करे। एक टैक्सी एसोसिएशन ने एनजीटी के 19 जून के उस आदेश के खिलाफ याचिका दायर की गई थी जिसमें टैक्सी परमिट की संख्या को निर्धारित किया गया था।
टैक्सी एसोसिएशन ने दावा किया कि उनकी करीब 2100 टैक्सियां हैं, जबकि प्रदेश सरकार ने 2517 टैक्सियां रजिस्टर होने की बात कही थी। इसके अलावा ग्रीन पैनल ने मनाली-रोहतांग रोड के प्रस्तावित रोपवे प्रोजेक्ट की स्टेटस रिपोर्ट भी तलब की है।
ट्रिब्यूनल ने कहा कि 26 जुलाई को प्रस्तावित सुनवाई पर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी खुद मौजूद रहकर स्थिति से अवगत कराएं। वहीं, ट्रिब्यूनल ने 9 किलोमीटर लंबे पालछन-रोहतांग रोपवे का विरोध करने वाले पालछन पंचायत के सरपंच को भी तलब किया है।
दरअसल, 19 जून को ट्रिब्यूनल ने सौ अतिरिक्त पर्यटन वाहनों को ईको सेंसिटिव रोहतांग पास एरिया में जाने की अनुमति दे दी थी।
इससे पहले उसने 800 पेट्रोल और 400 डीजल वाहनों को जाने की अनुमति दी थी। सर्किट बेंच ने कहा कि इन परमिट के लिए आने वाले आवेदनों में 75 प्रतिशत उन पर्यटकों को दिया जाना चाहिए जो अपने वाहनों में दूसरे प्रदेश से आते हैं।
वहीं, 25 प्रतिशत परमिट प्रदेश के दूसरे जिलों के वाहनों को ही दिए जाने चाहिए। जबकि एक हफ्ते में किसी भी टैक्सी को दो बार से ज्यादा संचालन की इजाजत नहीं होगी। बेंच से इसके साथ ही सुबह दस और शाम चार बजे आनलाइन परमिट देने की व्यवस्था करने को भी कहा है।
एनजीटी ने मांगा जंगल में आग की घटनाओं का ब्यौरा
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश सरकार को 2016 और 2017 में अभी तक जंगल में आग लगने की घटनाओं की जानकारी देने का कहा है। पीठ ने दोनों राज्यों से जंगल में आग से बचाव और संरक्षण को लेकर जारी किए गए दिशानिर्देशों को भी पेश करने को कहा है।
जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सीनियर एडवोकेट राजीव दत्ता की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुरक्षित कर लिया है। पीठ ने फैसला सुनाने से पहले तथ्यों और आंकड़ों के लिए 24 जुलाई को सुनवाई तय की है।
हिमाचल प्रदेश की ओर से पेश अधिवक्ता ने बताया कि 2016-17 के बीच जंगल में आग लगने की 1545 घटनाएं दर्ज की गई हैं। जिसके कारण 13,069 हेक्टेयर वन्य क्षेत्र प्रभावित हुआ, वहीं 1.53 करोड़ रुपये की क्षति हुई। इसके इतर 2015 में जंगल में आग लगने की कुल 672 घटनाएं ही दर्ज की गई थीं।
जिसके कारण 5,749.95 वन्य क्षेत्र प्रभावित हुआ था। वहीं 1.34 करोड़ रुपये की क्षति हुई थी। एनजीटी ने हाल ही में दोनों राज्यों को आदेश दिया था कि वे जंगल में आग संबंधी अपनी आपदा प्रबंधन योजना केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को सौंपे।
राज्यों की ओर से यह प्रबंधन योजना 2010 से लंबित है। वहीं पीठ ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से उन राज्यों के नाम भी बताने को कहा था जिन्होंने जंगल में आग से बचाव व प्रबंधन संबंधी योजना नहीं सौंपी हैं।