जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की बेंच ने फोरलेन निर्माण कर रही कंपनी को आदेश दिए हैं कि पर्यावरण से किसी भी प्रकार का खिलवाड़ सामने आया तो निर्माण कार्य पर रोक लगा दी जाएगी। बेंच ने फैसले में साफ कहा कि सतलुज नदी में मलबा डालना किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं होगा।
अपनी मर्जी से डंपिंग साइट बनाना और नदी में मलबा डालने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस फैसले से करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट पर संकट खड़ा हो सकता है। एनजीटी की बेंच ने 11 जुलाई को मदनलाल की एक याचिका पर यह फैसला सुनाया। सरकार को भी साफ किया कि निर्माण कार्य के दौरान डंपिंग से पर्यावरण को नुकसान नहीं होना चाहिए।
कहा कि निर्माण कर रही कंपनी ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से बनाई गई कमेटी के सुझाव और खामियों को फैसले से चार सप्ताह के अंदर दूर करे। इसके बाद ट्रिब्यूनल की ओर से गठित कमेटी फिर जायजा लेगी। कमेटी लोगों से भी बात करेगी। अगर फिर भी किसी प्रकार से अवैध डंपिंग साइट्स मिलीं या फिर मलबा नदी में डाला हुआ पकड़ा गया तो निर्माण कार्य पर तुरंत रोक लगा दी जाएगी।
यह है मामला
फोरलेन निर्माण में लगी कंपनी अवैध डंपिंग साइट और सतलुज नदी में निर्माण कार्य का मलबा डाल रही है। इस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने उक्त फैसला लिया है।
अमर उजाला उठा चुका है नदी में मलबा डालने का मामला
प्रदेश का नंबर वन समाचार पत्र ‘अमर उजाला’ भी 10 जून के अंक में सतलुज नदी में फोरलेन निर्माण कंपनी की ओर से नदी में मलबा डालने की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित कर चुका है। मलबा बलोह गांव के पास नदी में डाला जा रहा था।