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रोहतांग: रसूखदारों के रोप वे को नहीं उजाड़ पाए अफसर

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एनजीटी के आदेशों पर अमल करते हुए जिला प्रशासन ने आनन फानन एक दिन में रोहतांग और सोलंगनाला में बर्फ के बीच व्यावसायिक गतिविधियां चलाने वालों को हटा दिया है। लेकिन यह कार्रवाई सिर्फ गरीबों पर ही हुई, रसूखदारों पर हाथ डालने की अफसरों में हिम्मत नहीं हुई। सोलंगनाला में चल रहे एक रोपवे और कैफे पर प्रशासन मेहरबान दिखा।
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जबकि यह भी व्यावसियक गतिविधि के तहत आता है।  बताया जा रहा है कि इसमें प्रदेश का एक बड़ा नेता पार्टनर है। इससे विपरीत बुधवार को सड़क किनारे बैठकर मक्की बेचने वालों तक को नहीं बख्शा गया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यहां किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधियां नहीं होंगी।

कोई अफसर कुछ बोलने को तैयार नहीं

दबी जुबान में अधिकारी भी मान रहे हैं कि ट्रिब्यूनल के आदेश में सभी प्रकार के व्यावसायिक कारोबार को बंद करने को कहा गया है, लेकिन कोई अफसर कुछ बोलने को तैयार नहीं। स्थानीय दुकानदारों में सवाल उठ रहा है कि रसूखदारों पर पर मेहरबानी क्यों? सोलंगनाला से टॉप (ढलान) तक जाने के लिए करीब एक किलोमीटर का रोपवे बनाया गया है।

इसमें प्रति व्यक्ति 500 से 700 रुपये किराया वसूला जाता है। एक टॉली में करीब पांच से छह लोग भेजे जाते हैं। जबकि टॉप पर बने कैफे में कॉफी का एक कप (डिस्पोजल में) 90 रुपये का दिया जाता है। इसके अलावा अन्य खाद्य वस्तुओं के दाम भी मनमाने वसूले जाते हैं।
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डीसी बोले, अपनी जमीन पर कर सकते हैं कारोबार

इस बारे में अमर उजाला ने जब उपायुक्त कुल्लू राकेश कंवर से पूछा तो उनका तर्क था कि रोपवे के लिए सरकार ने जमीन लीज पर दी है। इसलिए उसे नहीं हटाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अपनी जमीन पर कारोबार किया जा सकता है। मजे की बात यह कि ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में यह कहीं नहीं कहा कि जमीन अगर लीज पर है या प्राइवेट है तो ऐसी जगह व्यावसायिक गतिविधि चल सकती है। बहरहाल इसे ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश का उल्लंघन माना जा रहा है।

उपायुक्त कुल्लू राकेश कंवर ने कहा कि रोपवे के लिए सरकार ने जमीन लीज पर दी है। उसे नहीं हटाया जा सकता है। अपनी जमीन पर कारोबार किया जा सकता है। मनाली टैक्सी यूनियन के वकील ने बताया कि ट्रिब्यूनल ने सभी व्यावसायिक गतिविधियां को रोकने के आदेश दिए हैं। ट्रिब्यूनल रोपवे, कैफे आदि को चलाने के बारे में अलग से निर्देश नहीं देता है।
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