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NCRB के आंकड़ों में हिमाचल की हालत बेहद खराब, सरकार के दावों की खुली पोल

Sat, 02 Dec 2017 01:47 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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गुड़िया प्रकरण से पूरे देश में चर्चा में रहे हिमाचल में दुराचार की शिकार हर दूसरी पीड़िता नाबालिग है। बेहतर कानून व्यवस्था का दावा करने वाली हिमाचल सरकार के दावों की राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के वर्ष 2016 के आंकड़ों ने पोल खोलकर रख दी है।
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एनसीआरबी आंकड़ों के अनुसार साल 2016 में कुल दर्ज हुए 258 दुराचार के मामलों में से 148 पीडि़ता अठारह साल से कम उम्र की थी। इनमें भी छह साल से कम उम्र के छह, 12 साल से कम उम्र के 13, 16 साल से कम उम्र के 67 और 18 से कम उम्र के 69 किशोरियां शामिल हैं।

हिमाचल के अलावा सिर्फ पंजाब एक राज्य है जहां हिमाचल की ही तरह दुराचार पीडि़तों में नाबालिगों का प्रतिशत 50 फीसदी के पार है। वहीं, पड़ोसी राज्यों जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड और हरियाणा में किशोरियों से दुराचार के कम मामले सामने आए हैं। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद एक बार फिर सरकार और पुलिस की कार्यशैली व दावों पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
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2014-2015 में भी किशोरियां ही थी निशाने पर

2016 की ही तरह साल 2015 में भी प्रदेश में दुराचार पीडि़तों में आधी से ज्यादा किशोरियां थीं। 2015 में प्रदेश में कुल दर्ज हुए 244 मामलों में से 150 पीडि़ता 18 से कम उम्र की थीं।

यही नहीं 2014 में भी दर्ज कुल 284 मामलों में से 135 में पीडि़ताओं की उम्र 18 साल से कम थी। ज्यादातर मामलों में आरोपी पीडि़ता के नजदीकी ही रहे।

गुडि़या प्रकरण से हिल गया था सूबा
2017 में गुडि़या प्रकरण सामने आया था, जहां एक किशोरी की गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई थी। विपक्ष व सामाजिक संगठनों ने जहां सरकार पर सवाल खड़े करते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी, वहीं सरकार लगातार कानून व्यवस्था अच्छी होने की बात कह रही थी।

हालांकि, सरकार ने जनता के दबाव के चलते मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी। इस मामले में ही प्रदेश पुलिस के नौ पुलिस अधिकारी व कर्मचारी जेल में हैं। वहीं गुडि़या से दुराचार व हत्या के मामले की अब भी जांच चल रही है।
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चुनाव में भी महिला सुरक्षा बना था मुद्दा

हाल में हुए विधानसभा चुनावों में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी व कम्युनिस्ट पार्टी ने प्रदेश सरकार को महिला सुरक्षा के मुद्दे पर घेरा था। विपक्ष जहां गुडि़या प्रकरण के जरिए सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा में असफल होने का आरोप लगा रही थी।

वहीं सरकार भी गुडि़या केस को सिर्फ एक अपवाद मानते हुए प्रदेश में कानून व्यवस्था भाजपा शासनकाल से बेहतर होने का दावा करती दिख रही थी।

महिला सुरक्षा मुद्दे के बीच ही 2017 के विधानसभा चुनावों में पुरुषों से करीब सात फीसदी ज्यादा महिलाओं ने मतदान किया है।
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