नेशनल अचीवमेंट सर्वे में शिमला और लाहौल-स्पीति जिले को छोड़कर शेष जिलों का ओवरआल प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से नीचे रहा है। राष्ट्रीय औसत कक्षा तीसरी के लिए 59, पांचवीं के लिए 49, आठवीं के लिए 41.9 और दसवीं के लिए 37.8 फीसदी है। इसकी औसत 46.9 फीसदी बनती है। शिमला जिले का औसत प्रदर्शन 48.88 फीसदी और लाहौल-स्पीति का 47.05 फीसदी रहा है। शेष जिलों का औसत प्रदर्शन इससे कम है।
बिलासपुर जिले का औसत प्रदर्शन 45.5 फीसदी, कुल्लू 44.45, ऊना 45.23, मंडी 46.2, सिरमौर 45.17, कांगड़ा 46.52, सोलन 45.07, किन्नौर 44.17, चंबा 40.3 और हमीरपुर जिले का 42.92 फीसदी है। कभी शिक्षा में नंबर वन रहने वाले हमीरपुर जिले की स्थिति काफी बिगड़ी है। सर्वे में राष्ट्रीय औसत से भी कम प्रदर्शन कई विषयों में हुआ है।
तीसरी और पांचवीं कक्षा में भाषा, गणित, पर्यावरण शिक्षा में प्रदर्शन राष्ट्रीय औसत से कम रहा है। सर्वे के प्रश्नों के उत्तर तीसरी कक्षा में सरकारी स्कूलों के बच्चों ने अधिक ठीक दिए हैं। कक्षा पांचवीं, आठवीं और दसवीं में निजी स्कूलों के विद्यार्थियों ने सरकारी से थोड़ा बेहतर प्रदर्शन किया है। कोविड काल में विद्यार्थियों में मूल ज्ञान का अभाव पाया गया है।
आधारभूत ज्ञान में पिछड़े हिमाचल के बच्चे
भाषा में कक्षा तीसरी के 32 फीसदी, पांचवीं कक्षा के 22 फीसदी, आठवीं कक्षा के 14 फीसदी, दसवीं कक्षा के अंग्रेजी विषय में 16 फीसदी और आधुनिक भारतीय भाषा में 46 फीसदी बच्चों को आधारभूत ज्ञान भी नहीं है। गणित में तीसरी के 26 फीसदी, पांचवीं के 41 फीसदी, आठवीं कक्षा के 27 फीसदी, दसवीं में 34 फीसदी बच्चों को आधारभूत ज्ञान नहीं है।
पर्यावरण अध्ययन विषय में तीसरी के 24 फीसदी और पांचवीं के 39 फीसदी विद्यार्थी बेसिक ज्ञान से वंचित हैं। विज्ञान विषय में कक्षा आठवीं के 33 फीसदी और दसवीं के 75 फीसदी बच्चे मौलिक ज्ञान से महरूम हैं। सामाजिक अध्ययन में कक्षा आठवीं के 47 फीसदी और दसवीं के 60 फीसदी बच्चे मौलिक ज्ञान से दूर हैं। राजकीय टीजीटी कला संघ प्रदेश महासचिव विजय हीर ने इस पर चिंता जताई है।