प्रदेश का तीसरा मेडिकल कॉलेज जुगाड़ तंत्र से ही शुरू हो सकेगा। हिमाचल पब्लिक सर्विस कमीशन और हिमाचल प्रदेश स्टाफ सेलेक्शन कमीशन को करीब तीन सौ डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की भर्ती के लिए भेजे प्रस्ताव पर कोई कदम न उठता देख स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने वैकल्पिक व्यवस्था के लिए कवायद शुरू कर दी है।
विभाग प्रदेशभर से ऐसे डाक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ की सूची बना रहा है जो या तो खुद नाहन में तैनाती चाह रहे हैं या फिर तैनाती वाले जिले या संस्थान में उनकी जरूरत नहीं है। दरअसल, देशभर के मेडिकल कॉलेजों में भर्ती के लिए इच्छुक अभ्यर्थी
अगस्त के तीसरे सप्ताह से नाहन मेडिकल कालेज को बतौर आप्शन चुनने लगेंगे। इसके बाद सितंबर के पहले हफ्ते से मेडिकल की पढ़ाई शुरू होनी है। ऐसे में अब विभाग ने जरूरी स्टाफ के लिए हाथ पांव मारने शुरू कर दिए हैं। विभाग का प्रयास है कि मेडिकल कॉलेज के पहले सत्र के लिए काउंसलिंग शुरू होने से पहले संचालन के लिए जरूरी स्टाफ की तैनाती की जाए।
काफी समय से अटका है प्रस्ताव
स्वास्थ्य विभाग ने काफी समय पहले मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ की भर्ती के लिए एचपीएससी और एचपीएसएससी को प्रस्ताव भेजा था। इसमें करीब सात प्रोफेसर, 17 असिस्टेंट प्रोफेसर, 17 ट्यूटर, 13 एसोसिएट प्रोफेसर, 24 रेजिडेंट डाक्टर, 24 जूनियर रेजिडेंट के पदो पर भर्ती का प्रस्ताव एचपीएससी को भेजा गया था। वहीं, एचपीएसएससी को भी 141 स्टाफ नर्स, 45 लैब टेक्नीशियन, 21 फार्मासिस्ट, 37 लैब असिस्टेंट समेत करीब 84 कैटेगरी के पदों को भरने का प्रस्ताव दोनों जगह भेजा था। लेकिन व्यवस्था की मजबूरियों के चलते दोनों ही आयोग अब तक भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं कर सके हैं।
डीओ लेटर, सिफारिश और बहानेबाजी बनी मुसीबत
स्टाफ की तलाश में जुटे आला अधिकारियों के लिए डीओ लेटर, सिफारिश व बहानेबाजी मुसीबत बनी हुई है। दरअसल, कई जगह ऐसी हैं जहां पैरा मेडिकल स्टाफ जरूरत से ज्यादा है। विभाग ऐसी जगहों से स्टाफ को नाहन मेडिकल कालेज ट्रांसफर कर रहा है। लेकिन उसकी कवायद से पहले ही या तो अधिकारी-कर्मचारी बहाना बनाकर जाने से बचने का प्रयास कर रहे हैं। इससे भी बात न बनने पर विधायकों और सीपीएस तक के डीओ लेटर तक लगाए जा रहे हैं।
प्रधान सचिव स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण प्रबोध सक्सेना ने कहा कि प्रयास किया जा रहा है कि मेडिकल कॉलेज पूरी तैयारी के साथ शुरू हो। चूंकि अभी नए स्टाफ का चयन नहीं हो सका है इसलिए दूसरी जगहों से विशेषज्ञों व पैरा मेडिकल स्टाफ को अस्थायी तौर पर वहां लगाया जाएगा। जैसे जैसे स्थायी स्टाफ की भर्ती होती जाएगी, उस हिसाब से तैनात स्टाफ को जरूरत वाले अन्य स्थानों पर तैनात कर दिया जाएगा।