कस्तूरी मृग हिमालयी क्षेत्र में 2400 से 3600 मीटर तक की ऊंचाई पर तिब्बत, नेपाल, उत्तराखंड, चीन, साइबेरिया, कोरिया आदि के पहाड़ी इलाकों में पाया जाता है। इसके शरीर का रंग बदलता रहता है। पेट और कमर के निचला भाग लगभग सफेद ही होता है और बाकी शरीर कत्थई भूरे रंग का होता है।
कस्तूरी मृग पहाड़ी जंगलों की चट्टानों के दर्रों में रहता है। साधारणतया यह अपने निवास स्थान को बर्फबारी में भी नहीं छोड़ता है। इसके कान लंबे और गोलाकार होते हैं और इसकी श्रवण शक्ति बहुत तीक्ष्ण होती है। इनका भार 7 से 17 किलो तक होता है। कस्तूरी केवल नर मृग में पाई जाती है जो इस के पेट के निचले भाग में जननांग के समीप होती है।
एक मृग में लगभग 30 से 45 ग्राम तक कस्तूरी पाई जाती है। नर की बिना बालों वाली पूंछ होती है। इसके सींग नहीं होते। पीछे के पैर आगे के पैर से लंबे होते हैं। कस्तूरी का उपयोग औषधि के रूप में दमा, मिर्गी, निमोनिया आदि की दवा बनाने में होता है। कस्तूरी से बनने वाला इत्र अपनी खुशबू के लिए प्रसिद्ध है। कस्तूरी मृग संकटग्रस्त दुर्लभ प्रजातियों में शामिल है।