हिमाचल प्रदेश की नगर परिषद चंबा का एक अजीबोगरीब कदम शहर में चर्चा का विषय बन गया है। नप ने फरमान जारी कर शहर के ऐतिहासिक हरिराय मंदिर को भी गृहकर के दायरे में ला दिया है। मंदिर पर 4600 रुपये गृहकर लगाए जाने की बात सामने आई है। इसका मंदिर प्रबंधन को नोटिस भी भेजा गया है। इस बीच, नगर परिषद चंबा के इस कदम पर शहर के प्रबुद्धजनों ने हैरानी जताते रोष व्यक्त किया है। हांलाकि, नप के अधिकारी इसे त्रुटिवश होने की बात कह कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। गौर रहे कि जिले के 5200 गृह कर मालिकों पर नगर परिषद चंबा ने गृहकर की थोप दी। गृहकर में वृद्धि के खिलाफ शहर के लोग एकजुट होने लगे हैं।
इसी क्रम में अब नगर परिषद चंबा ने शहर के बीचोबीच स्थित ऐतिहासिक हरिराय मंदिर को भी गृहकर दायरे में लाते हुए मंदिर प्रबंधन को बिल थमा दिया है। शहर के निवासी जनकराज सम्मी, डॉ. डीके सोनी, देविंद्र शर्मा, ओम गुलेरिया, लेखराज धीमान, अशोक महाजन, अजितेश शर्मा, जीत राम शर्मा, हेमेंद्र शर्मा, पीसी ओवराय, किशोर शर्मा, शादी लाल ने नगर परिषद चंबा के इस फरमान को तानाशाही रवैया करार दिया है। कहा कि शहर के लोगों को गृहकर की आर्थिक मार देने के बाद अब चंबा के देवी-देताओं के मंदिरों को भी गृहकर के दायरे में लाए जाने का फरमान सरासर गलत है। इसका डटकर विरोध किया जाएगा।
नप चंबा ने मंदिर पर 4600 रुपये गृहकर लगाया गया है। नप की यह कार्रवाई तर्कसंगत नहीं हैं। नप चंबा को गृहकर आवासीय और व्यावसायिक भवनों तक ही सीमित रखने चाहिए। नप चंबा मंदिर प्रबंधन को दिए गृह कर के बिल को रद्द करे।
-हरिराय मंदिर के पुजारी पंडित युगल किशोर शर्मा
हो सकता है नगर परिषद चंबा से त्रुटिवश मंदिर को गृह कर का बिल जारी हो गया होगा। इस प्रकार की गलती पुन: न हो इसके लिए नप चंबा को देखना चाहिए।
-पवन नैयर, पूर्व विधायक, चंबा
ऐतिहासिक मंदिरों को गृह कर के दायरे में लाना गलत है। इस मामले में जल्द ही नप के अधिकारियों से बातचीत की जाएगी।
-नीरज नैयर, सदर विधायक, चंबा