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अश्वनी खड्ड के पानी में मिला मनुष्य के मल में पाया जाने वाला बैक्टीरिया

Tue, 05 Jan 2016 10:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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नगर निगम की ओर से भरा गया अश्वनी खड्ड परियोजना के पानी का सैंपल फेल हो गया है। दो जनवरी को नगर निगम की टीम ने महापौर संजय चौहान की अगुवाई में अश्वनी खड्ड परियोजना से पानी का सैंपल भरा था।
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सैंपल की जांच के दौरान पानी में हानिकारक बैक्टीरिया पालिफार्म की मात्रा 15 एमपीएन पाई गई है, जबकि पीने योग्य पानी में इसकी मात्रा शून्य होनी चाहिए।

यह बैक्टीरिया मनुष्य के मल में होता है। अश्वनी खड्ड के पानी में बैक्टीरिया मिलने से साफ हो गया है कि सीवरेज का पानी अश्वनी खड्ड में मिल रहा है। यह स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।

सोमवार को नगर निगम महापौर संजय चौहान की अध्यक्षता में आयोजित नगर निगम, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग, स्वास्थ्य विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों की बैठक में यह खुलासा हुआ।
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बीते शनिवार को नगर निगम की टीम ने मेयर संजय चौहान की अगुवाई में मल्याणा स्थित सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और अश्वनी खड्ड परियोजना का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान बेहद गंभीर खामियां सामने आई थी।

निरीक्षण के दौरान पाया गया था कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाली गंदगी सीधे अश्वनी खड्ड के पानी में मिल रही है।

निरीक्षण के दौरान निगम अभियंता, निगम स्वास्थ्य अधिकारी, सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अधिशासी अभियंता सहित नगर निगम के पार्षद मौजूद थे।

निरीक्षण में यह खामियां आई थी सामने
- सही काम नहीं कर रहा था सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट
- प्लांट से स्लज उठाने की नहीं थी कोई व्यवस्था
- बिजली गुल होने पर पावर बैकअप की नहीं थी कोई व्यवस्था
- 2014 के ब्लीचिंग पाउडर का हो रहा था इस्तेमाल
- पानी के क्लोरिनेशन में बरती जा रही थी लापरवाही

शहर में दूषित पानी की आपूर्ति रोकने को लेकर स्थायी समाधान तलाशने के लिए सोमवार को एक कमेटी का गठन किया गया। सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य विभाग के अधीक्षण अभियंता सुशील जस्टा, एसएसओ डा. राकेश भारद्वाज, निगम स्वास्थ्य अधिकारी डा. सोनम नेगी और निगम अभियंता विजय गुप्ता को कमेटी का सदस्य बनाया गया है।

यह कमेटी शहर में दूषित पानी की आपूर्ति को रोकने के लिए शाट टर्म और लांग टर्म प्रयासों को लेकर सुझाव देगी। यह कमेटी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट मल्याणा और ढली में सुधार को लेकर भी सुझाव देगी। कमेटी के सुझावों को अमृत मिशन में शामिल किया जाएगा।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि पंपिंग से पहले पानी की जांच करना आईपीएच की जिम्मेवारी है। पानी पंपिंग के बाद शहर को सप्लाई किया जाना है वह पीने योग्य है भी या नहीं इसका पता होना बेहद जरूरी है। आईपीएच को रोजाना पंपिंग से पहले पानी के सैंपल लेने होंगे। अश्वनी खड्ड के सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद ही शहर को पानी की आपूर्ति की जाएगी।
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एमसी की प्रदेश सरकार से मांग
1 - शहर को पानी देने वाली स्कीमों में लगाए जाएं ओजोनाइजेशन प्लांट
2 - पूना की तर्ज पर हेपेटाइटिस की जांच के लिए शिमला में स्थापित की जाए लैब
3 - सतलुज से राजधानी को पानी लाने की स्कीम पर तुरंत शुरू किया जाए काम
4 - सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन कर ठेकेदार को लगाई जाए पेनल्टी
5 - लापरवाह आईपीएच अधिकारियों के खिलाफ की जाए कार्रवाई
6 - अश्वनी खड्ड के पानी के सैंपल जांच के लिए तुरंत पूने लैब भेजे जाएं
7 - सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के डिस्चार्ज की नियमित मानीटरिंग की जाए
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