नगर निगम की मासिक बैठक में मंगलवार को पानी के नए मीटरों में गड़बड़ी और पार्षद निधि को बहाल न किए जाने को लेकर जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस पार्षद अर्चना धवन ने प्रशासन से तीखे सवाल किए। पूछा आखिर नए मीटरों में लीकेज की शिकायतें क्यों आ रही हैं। क्यों घटिया क्वालिटी का मटीरियल लगाया जा रहा है। शिकायत करो तो हफ्ते बाद ठेकेदार मौके पर पहुंचते हैं। कई घरों में अभी से नए मीटर फट रहे हैं, सर्दियों में ये कैसे टिक पाएंगे। जिनके मीटरों से लीकेज हो रही है, उसका बिल कौन देगा।
कहा कि ठेकेदार की पेमेंट रोकी जाई। पार्षद आनंद कौशल ने कहा कि कंपनी वाले पुराने मीटरों को भी साथ ले गए। इंद्रजीत सिंह ने कहा कि नए मीटरों से प्रैशर भी कम है। संजय परमार बोले कि ज्यादा मीटर लगाने के चक्कर में गलत फीटिंग की जा रही है। ज्यादातर पार्षद बोले कि कंपनी को पेेमेंट सर्दी के मौसम के बाद किया जाना चाहिए। सवालों का जवाब देते हुए अधीक्षण अभियंता धर्मेंद्र गिल ने कहा कि मीटर संबंधी शिकायतों को दूर करने के लिए निगम ने अलग से कनिष्ठ अभियंता की तैनाती कर दी है। कहा कि कई मीटरों से नॉन रिटर्न वॉल और स्टेनर भी हटाए जा रहे हैं।
सितंबर से रीडिंग पर बिल देने का दावा, फ्लैट रेट से मिलेगी राहत
एमसी ने सितंबर से ही मीटर रीडिंग पर पानी के बिल जारी करने का दावा किया है। पार्षद मीरा शर्मा ने सवाल किया कि मीटर लगाने का काम सितंबर तक पूरा होना था, लेकिन इसमें अभी भी छह महीने लग जाएंगे। ऐसे में पानी के बिल कैसे जारी होंगे। आयुक्त जीसी नेगी ने बताया कि जिन घरों में मीटर लग गए हैं और वे सही ढंग से काम कर रहे हैं, उनके बिल सितंबर से रीडिंग आधार पर ही जारी होंगे। बाकी जो मीटर लगाए जाने हैं, उनका काम जल्द पूरा कर सभी को फ्लैट बिल से राहत दी जाएगी।
पार्षद निधि पर अफसरों की क्लास
पार्षद निधि न बनने से गुस्साए पार्षदों ने निगम अफसरों की खूब क्लास ली। पूछा कि जब सदन ने 25 लाख के बजट वाली पार्षद निधि बनाने का प्रस्ताव पारित कर दिया था तो फिर अभी तक निधि क्यों नहीं बनाई। पार्षद अर्चना धवन बोलीं कि प्रशासन शायद आचार संहिता का इंतजार कर रहा है। शैलेंद्र चौहान ने कहा कि बरसात के बाद निधि बनेगी, तो इसका क्या फायदा होगा। मीरा शर्मा और सत्या कौंडल ने भी प्रशासन पर सवाल दागे। संयुक्त आयुक्त ने कहा कि इसे सांसद निधि के आधार पर बनाने के लिए नियम बनाए जा रहे हैं।
भाजपा पार्षदों के दिल्ली दौरे पर भी गरमाया सदन
मेयर, डिप्टी मेयर समेत भाजपा पार्षदों के पीएम मोदी से मुलाकात को लेकर भी सदन गरमाया। समरहिल पार्षद शैली शर्मा ने पूछा कि क्या पीएम सिर्फ भाजपा के ही हैं जो बाकी पार्षदों को बुलाया तक नहीं गया। सांगटी पार्षद मीरा ने मेयर से पूछा कि पीएम से स्मार्ट सिटी और अमृत मिशन पर चर्चा की गई, क्या ये प्रोजेक्ट सिर्फ भाजपा पार्षदों के वार्डों में ही लागू होने हैं। आनंद कौशल बोले कि कम से कम इस दौरे के बारे में हमें बताया जाना चाहिए था। मेयर कुसुम सदरेट ने जवाब दिया कि यह दौरा पार्टी के ही पार्षदों का दौरा था।
करोड़ों रुपये के प्रोजेक्टों के प्रस्तावों को मिली मंजूरी
बैठक में बरसात से हुए नुकसान की भरपाई करने के लिए 1.51 करोड़ के बजट को मंजूरी दी गई। मर्ज एरिया के विकास के लिए भी तीन करोड़ के बजट को पारित किया गया। इसके अलावा कैजुअल सफाई कर्मियों की समयावधि तीन माह बढ़ाने और निगम में कार्यरत अनुबंध कर्मियों को 75 फीसदी की दर से बढ़ी हुई आय का भुगतान करने को भी मंजूरी मिली। करीब 41 लाख की लागत से बनने वाले 3.5 लाख लिटर रेन हारवेस्टिंग टैंक बनाने, वार्डों में सीवरेज लाइन और एसटीपी के सुधार के लिए 13.59 लाख के बजट को पारित किया गया। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट कार्यालय न्यू शिमला कम्युनिटी हॉल में स्थापित किया जाएगा।
ऑनलाइन शिकायतें निपटाने के लिए बनें टाइमलाइन : किमी सूद
बैनमौर पार्षद किमी सूद ने कहा कि ऑनलाइन शिकायतों को निपटाने के लिए निगम की ओर से कोई समयसीमा तय नहीं की गई है। यदि समय से शिकायत दूर हों तो जनता को राहत मिलेगी। कहा कि प्रशासन अधिकारियों की ड्यूटी तय करें। आयुक्त ने कहा कि इस पर दिशा निर्देश जारी किए जाएंगे।
रोज रिकॉर्ड पंपिंग, फिर भी तीसरे दिन पानी
समरहिल पार्षद शैली शर्मा ने पूछा कि रोज रिकॉर्ड पंपिंग हो रही है लेकिन जनता को तीसरे दिन पानी दिया जा रहा है। आखिर पानी जा कहां रहा है, कब से लोगों को रोज पानी मिलने लगेगा। इस पर मेयर ने कहा कि कुछेक वार्डों में रोज पानी देने का ट्रायल चल रहा है। यदि पंपिंग का स्तर बना रहता है तो जल्द ही लोगों को रोज पानी दिया जाएगा।
निगम के बाहरी क्षेत्र को पानी देने पर विवाद
निगम क्षेत्र से बाहर के एरिया और सोसाइटी को पानी देने पर भी सदन में चर्चा हुई। इंजनघर पार्षद आरती चौहान ने कहा कि निगम पानी बाहर नहीं दिया जाना चाहिए। शैलेंद्र चौहान ने कहा कि उन्हें पानी देने पर आपत्ति नहीं लेकिन अब जो इनके लिए बड़ी लाइन बिछाई जा रही है, उसपर सहमति क्यों नहीं ली जा रही। तय किया गया कि इस मुद्दे पर अगले बैठक में चर्चा की जाएगी ताकि स्पष्ट हो सके कि निगम के बाहरी क्षेत्रों में कितना पानी दिया जाना है।
स्लॉटर रेट पर भी गरमाया सदन
कृष्णानगर स्थित स्लॉटर हाउस में स्लॉटर के रेट को लेकर भी सदन में पार्षदों और स्वास्थ्य अधिकारी के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पार्षद विवेक शर्मा, शैली शर्मा ने कहा कि निगम को इसकी कमाई से जो शेयर मिलना था, वो नहीं मिल रहा। इस पर अगले सदन में चर्चा होनी चाहिए।