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शिमला नगर निगम चुनाव भाजपा-कांग्रेस का ‘लिटमस टेस्ट’

Mon, 12 Jun 2017 02:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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नगर निगम शिमला के चुनाव भाजपा और कांग्रेस के लिए लिटमस टेस्ट है। भाजपा की केंद्रीय लीडरशिप खुद चुनाव की मॉनीटरिंग कर रही है तो कांग्रेस आलाकमान मुख्यमंत्री वीरभद्र और प्रदेश अध्यक्ष सुक्खू के भरोसे है। दोनों दल निगम चुनाव को विधानसभा के सेमीफाइनल के तौर पर देख रहे हैं। 
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दोनों ओर के दिग्गज नेता वार्डों में नुक्कड़ सभाएं कर रहे हैं। एक ओर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह अपने सरकारी कार्यक्रम टाल शिमला में डेरा जमाए हैं, दूसरी तरफ भाजपा से केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के प्रचार अभियान के बाद पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल की जनसभाएं करवाने की तैयारी में जुटी है। पूरी ताकत से उतरे दलों ने अपने नेताओं की जवाबदेही तक सुनिश्चित कर दी है। 

शिमला में मेयर की कुर्सी जिसके पाले से खिसकी, उसका असर नेताओं के सियासी कद पर दिख सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शिमला रैली से चुनावी शंखनाद कर चुकी भाजपा की विधानसभा से पहले निगम चुनाव पर नजर है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पालमपुर में निगम चुनाव को लेकर प्रदेश संगठन को विशेष दिशा-निर्देश दिए थे।
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उसके बाद लगातार केंद्रीय मंत्रियों के दौरों से पार्टी अपने पक्ष में सियासी माहौल बनाने में जुटी है। विधानसभा से कुछ माह पहले हो रहे निगम चुनाव को सियासी दल प्रैक्टिस मैच की तरह ले रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस ने विधानसभा की तरह हर वार्ड में प्रदेश स्तरीय नेता को प्रभारी बनाया है।

कांग्रेस ने जहां अपने मुख्यमंत्री वीरभद्र की अगुवाई में अधिकांश मंत्रिमंडल को शिमला में डटे रहने के निर्देश दिए हैं। वहीं, भाजपा के सांसद-विधायक भी शिमला में डेरा डाले हुए हैं। 13 जून केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी मंडी में प्रदेश सरकार पर निशाना साध सियासत को गर्माएंगे। पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल 14 जून को शिमला पहुंच रहे हैं।

इससे पहले प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती वार्डों में घूमकर चुनाव प्रबंधन का जायजा ले रहे हैं। भाजपा ने भले पार्टी सिंबल पर प्रत्याशी नहीं उतारे, लेकिन बगावत करने वालों को पार्टी से बाहर कर विधानसभा के लिए भी संदेश दिया जा रहा है। उधर, कांग्रेस ने भले कुछ वार्डों में समर्थित प्रत्याशी भी नहीं उतारे, लेकिन बागियों के खिलाफ पार्टी के तेवर कड़े हैं। 

भाजपा निगम में जीत को विधानसभा चुनाव तक ले जाने की कोशिश में है तो कांग्रेस चाहती है कि मोदी के विजय रथ को शिमला में ही रोक दिया जाए। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू को इसी के चलते आलाकमान ने दिल्ली

बुलाकर समझाया बुझाया है। जानकाराें के अनुसार भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस वामदलों का भी साथ लेने से नहीं चूकेगी। चर्चा यह भी है कि वामपंथियों ने अघोषित समझौते के तहत ही कई वार्डों में प्रत्याशी तक नहीं उतारे हैं।
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