शिमला के भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में प्रदर्शित एक दुर्लभ ताड़पत्र पांडुलिपि प्राचीन भारतीय ज्ञान और संस्कृति के अध्ययन को लेकर चर्चा में है। ओडिशा में मुक्ति राम द्वारा खोजी गई बताई जा रही इस पांडुलिपि में महाभारत और हिमालय में पांडवों की यात्रा के प्रसंग होने का दावा किया गया है। इसे लगभग 5100 साल पुराना बताया जा रहा है, लेकिन इसकी उम्र की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है।