तीन साल की बेटी को पड़ोसी के पास छोड़कर खुद मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में सेवाएं दे रही कोरोना योद्धा स्टाफ नर्स विजेता धर्माणी ने मिसाल पेश की है। स्टाफ नर्स की बेटी का नाम आव्यकुंज है। विजेता धर्माणी वर्तमान में कोविड-19 से बचने के लिए स्थापित वैक्सीनेशन सेंटर में सेवाएं दे रही हैं। इससे पूर्व वह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सेवारत थीं। 16 जनवरी से वह बिना छुट्टी लिए लोगों को वैक्सीन लगा रही हैं।
तीन साल की बेटी को पड़ोसी के पास छोड़कर खुद मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में सेवाएं दे रही कोरोना योद्धा स्टाफ नर्स विजेता धर्माणी ने मिसाल पेश की है। स्टाफ नर्स की बेटी का नाम आव्यकुंज है। विजेता धर्माणी वर्तमान में कोविड-19 से बचने के लिए स्थापित वैक्सीनेशन सेंटर में सेवाएं दे रही हैं। इससे पूर्व वह मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में सेवारत थीं। 16 जनवरी से वह बिना छुट्टी लिए लोगों को वैक्सीन लगा रही हैं।
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विजेता धर्माणी ने बताया कि कई बार बेटी का ख्याल आता है, लेकिन लोगों की जान बचाना भी जरूरी है। इसलिए मां की ममता के साथ काम भी जरूरी है। मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रमेश चौहान ने बताया कि वैसे तो अस्पताल की कई स्टाफ नर्सें अपनी महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं लेकिन पता चला है कि विजेता धर्माणी की बेटी अभी काफी छोटी है। अकसर छोटे बच्चे माता-पिता को ढूंढते हैं।