शिमला के तारादेवी मंदिर से सटे जंगल में देवदार, बान सहित अन्य किस्म के 477 पेड़ और जाखू में 32 पेड़ काटे जाने का मामला सामने आया है।
नियमों को ताक पर रख बिना अनुमति यह पेड़ निजी भूमि में कटे हैं। वन विभाग ने मौके का मुआयना कर पेड़ों को चिह्नित कर लिया है। तारादेवी मंदिर के जंगल में सात पेड़ देवदार के काटे गए हैं। 470 पेड़ बान और अन्य किस्म के हैं।
वन विभाग ने मामले की जानकारी मिलते ही डिप्टी रेंजर और गार्ड को सस्पेंड कर दिया है। रेंज आफिसर की बीट बदल दी गई है। विभाग ने निजी भूमि मालिक के खिलाफ डीआर (डैमेज रिपोर्ट) कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
पुलिस थाना बालूगंज में मामला भी दर्ज कराया गया है। वन विभाग के प्रधान मुख्य अरण्यपाल सुशील श्रीवास्तव ने विभागीय कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की पुष्टि करते हुए बताया है कि मामले की जांच जारी है।
सस्पेंड हुए फोरेस्ट गार्ड और डिप्टी रेंजर
तारादेवी मंदिर के सटे जंगल में पेड़ काटने की यह घटना 14 नवंबर से पहले हुई है। वन विभाग को घटना की जानकारी 14 नवंबर को हुई। विभागीय अधिकारियों और कर्मियों ने इस पूरे मामले को गोपनीय रखा।
काटे हुए पेड़ों की गिनती भी मौके पर जाकर हुई है। काटे गए पेड़ों में देवदार के सात पेड़ हैं। शेष पेड़ बान और अन्य किस्म के हैं। छोटे-बड़े पेड़ इसमें शामिल हैं।
उधर, जाखू के जंगल में मच्छी वाली कोठी के पास वीरवार को पापूलर के 32 पेड़ काटे गए हैं। पेड़ों को काट कर यहीं पर चलाने का प्रयास किए जाने से मामले की जानकारी मिली।
उपमहापौर टिकेंद्र पंवर ने मौके का दौरा कर वन विभाग को मामले की सूचना दी। डीएफओ सहित अन्य अफसरों ने मौके पर पहुंचकर डैमेज रिपोर्ट काट दी है।
गड्ढों में जलाई पेड़ों की टहनियां
तारादेवी के जंगल में काटे गए पेड़ों की टहनियों को जलाने के लिए बड़े-बड़े गड्ढे किए गए हैं। इसके अलावा जंगल में भी भारी मात्रा में टहनियां गिरी हुई हैं।
मशीनों से काटे गए हैं सभी पेड़
तारादेवी में कटे हुए सभी पेड़ों के ठूंठ समतल हैं। पेड़ काटने में आधुनिक मशीनों का प्रयोग किया गया है। मशीनों से बड़ी ही सफाई से पेड़ काटे गए हैं। पेड़ काटने के बाद उन्हें ठिकाने लगाने का भी जंगल में कोई नामोनिशान नहीं है।
बालूगंज पुलिस का कहना है कि वीरवार को वन महकमे के बीट अफसर की ओर से लिखित में शिकायत की गई है। पेड़ वन भूमि पर काटे गए हैं या फिर निजी भूमि में। इसका रिकार्ड हासिल किया जाएगा। शुरूआती छानबीन करने के बाद ही मुकदमा दर्ज किया जाएगा।