भारी बरसात से हिमाचल में दस पक्के और 86 कच्चे मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। 31 पक्के और 301 कच्चे मकानों को आंशिक तौर पर, जबकि 257 पशुशालाओं को नुकसान पहुंचा है। एग्रीकल्चर, हॉर्टीकल्चर और आईपीएच की स्कीमों को भी करोड़ों की चपत लगी है। इसका आकलन संबंधित विभाग कर रहे हैं। आपदा से निपटने के लिए उपायुक्तों एवं विभिन्न विभागों को 42 करोड़ रुपये जारी किए हैं।
आपदा प्रबंधन बोर्ड के उपाध्यक्ष राजेंद्र राणा ने कहा कि आपदा प्रबंधन के लिए सभी जिला मुख्यालयों में आवश्यक प्लान तैयार किए हैं। मानसून से पहले सभी जिलों में आपदा प्रबंधन पर बैठकें की गई हैं। सभी जिलों के लिए आवश्यक उपकरण खरीदने तथा कंट्रोल रूम स्थापित करने के दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं।
कहा कि पहली जुलाई से सभी जिला मुख्यालयों पर कंट्रोल रूम स्थापित किए गए हैं। बरसात से हो रहे नुकसान की नियमित रिपोर्ट जिला प्रशासन के माध्यम से मंगवाई जा रही है। साथ ही सड़कों तथा पेयजल स्कीमों के सुचारु कार्यान्वयन को कदम उठाए जा रहे हैं। बरसात से प्रभावित परिवारों को फौरी राहत के तौर पर अब तक 328 लाख रुपये बांटे जा चुके हैं। कहा कि सरकार बरसात के मौसम में आपदा प्रबंधन को लेकर मुस्तैद है।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष तौर पर निगरानी रखी जा रही है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में झुग्गी झोपड़ियां हटा दी गई हैं। मौसम विभाग से तालमेल कर भारी बारिश इत्यादि की सूचना भी जिला प्रशासन के माध्यम से लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। राणा ने कहा कि प्रदेश में राहत राशि के तौर पर अब तक 5.25 करोड़ रुपये की राशि दी जा चुकी है।