शिमला। शहर के लोगों को बंदरों के आतंक से बचाने के लिए नगर निगम और वन्य जीव विभाग के माध्यम से तैनात किए मंकी वाचर कहीं नहीं दिख रहे हैं। कुछ दिन यह मंकी वाचर शहर में गुलेल और डंडों के साथ तैनात रहे लेकिन अब ये गायब हैं। उपनगरों में लोगों का चलना तक मुश्किल हो गया है। राजधानी में जनवरी से लेकर जून माह तक 773 लोगों को बंदरों ने शिकार बनाया। आईजीएमसी में 366 और डीडीयू में 407 लोग हमले के बाद उपचार को पहुंचे। हाल ही में बंदर के हमले में घायल बच्चे को नाजुक हालत में पीजीआई रेफर किया गया है।
---
मालरोड और रिज पर कुत्तों का खौफ
मालरोड, लिफ्ट और रिज मैदान पर आवारा कुत्तों के आतंक से भी लोग परेशान हैं। छह महीनों के दौरान 830 लोगों को कुत्तों ने काटा। आईजीएमसी में 397 और डीडीयू में 433 लोग उपचार करवाने आए। मालरोड पर अक्सर कुत्तों के झुंडों को घूमते हुए देखा जा सकता है। विभाग नसबंदी करवाने के दावे करता है लेकिन शहर में कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। उधर, नगर निगम के वीपीएचओ डॉ. नीरज मोहन का कहना है कि जिन कुत्तों के काटने की शिकायत आती है, निगम उन्हें पकड़ लेता है। दूसरे कुत्तों को निगम नहीं पकड़ सकता। शहर में अब तक नौ हजार से अधिक कुत्तों की नसबंदी करवा चुके हैं।
इन क्षेत्रों से अधिक आतंक
राजधानी के संजौली, ढली बाईपास, जाखू, पंथाघाटी, कसुम्पटी, विकासनगर, न्यू शिमला, कार्ट रोड, टूटीकंडी, लोअर बाजार, मिडल बाजार, चौड़ा मैदान और टुटू में बंदरों तथा आवारा कुत्तों का सबसे अधिक आतंक है। सबसे ज्यादा मामले यहीं से आते हैं।
---
आईजीएमसी डीडीयू
माह मंकी बाइट केस डॉग बाइट माह मंकी बाइट केस डॉग बाइट
जनवरी 21 65 जनवरी 25 79
फरवरी 25 43 फरवरी 24 63
मार्च 36 75 मार्च 43 102
अप्रैल 58 60 अप्रैल 93 63
मई 85 50 मई 136 89
जून 141 104 जून 86 37
--------------------------------------------------------------------------
कुल संख्या 366 397 407 433