सीबीआई किसी मामले में प्रारंभिक जांच के बाद दोबारा जांच नहीं कर सकती। हिमाचल के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के वकीलों ने यह दलील बुधवार को हाईकोर्ट के समक्ष रखी। दूसरी ओर वीरभद्र के बेटे विक्रमादित्य ने ईडी से गिरफ्तारी से सुरक्षा मांगी है।जस्टिस विपिन सांघी की पीठ के समक्ष वीरभद्र सिंह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन ने कहा कि कॉमन कॉज नाम की संस्था की शिकायत पर सीबीआई ने इस मामले में प्रारंभिक जांच की थी।
एजेंसी ने शुरुआती जांच के बाद कोर्ट को बताया था कि उन्हें ऐसा कोई साक्ष्य नहीं मिला है जिसके आधार पर मुख्यमंत्री या अन्य किसी व्यक्ति के खिलाफ मामला बनता हो लेकिन केंद्र की सरकार बदलते ही सीबीआई ने इस मामले की दोबारा जांच शुरू कर दी। इन तथ्यों से साफ है कि यह जांच राजनीति से प्रेरित है। एक बार जांच पूरी करने के बाद एजेंसी दोबारा जांच शुरू कैसे कर सकती है। एजेंसी ने जो एफआईआर दर्ज की है, वह पूरी तरह गैर कानूनी है।
बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि सीबीआई की जांच व कार्रवाई गैर कानूनी है। एजेंसी के पास मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों को साबित करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं हैं। कोर्ट ने इस मामले की रोजाना सुनवाई करने का निर्देश 27 सितंबर को दिया है। मामले की अगली सुनवाई अब 29 सितंबर को होगी।
सीबीआई ने वीरभद्र, उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह व अन्य पर आय से अधिक संपत्ति के आरोप में भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की धाराओं में मामला दर्ज किया था। इस मामले को वीरभद्र सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। वहीं जांच एजेंसी इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने की अनुमति मांग रही है।
सीएम के बेटे ने मांगी गिरफ्तारी से छूट
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य को पूछताछ के लिए बुलाया है और उसे संदेह है कि एजेंसी उसे गिरफ्तार कर सकती है। उसने गिरफ्तारी से सुरक्षा दिलाने के लिए याचिका दायर की है। इस याचिका पर वीरवार को सुनवाई होगी। याचिका में कहा गया है कि ईडी ने विक्रमादित्य को पूछताछ के लिए 30 सितंबर को बुलाया है। वह उससे मामले में पहले पेश न होने का कारण भी पूछेगी।
जस्टिस एके पाठक की पीठ के समक्ष याची के अधिवक्ता दयान कृष्णन ने कहा कि एजेंसी ने उनके मुव्वकिल को पूछताछ के लिए बुलाया है और उसे आशंका है कि पूछताछ के दौरान उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। इन हालात में उसे गिरफ्तारी से सुरक्षा दी जाए। वरिष्ठ अधिवक्ता कृष्णन ने दलील दी कि ईडी की एफआईआर में याची का नाम नहीं है। इस मामले में ईडी ने इससे पहले वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह के बयान लिए थे।