हिमाचल सहित देश के अन्य राज्यों में नियुक्त केंद्रीय अर्द्ध सरकारी संगठनों को मोदी सरकार ने बड़ा झटका दिया है। केंद्र सरकार ने इन संस्थानों में तैनात कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान देने पर कई पेच लगा दिए हैं।
इससे सीपीआरआई, पादप आनुवांशिकी ब्यूरो जैसे भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के कार्यालयों को झटका लगा है। हिमाचल में भी केंद्रीय संगठनों में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद आदि से जुडे़ अनेक कार्यालय शामिल हैं।
13 जनवरी को केंद्र सरकार के वित्त मंत्रालय की ओर से सभी मंत्रालयों और विभागों को इस बारे में पत्र भेजा है। ये पत्र वित्त मंत्रालय के निदेशक अमरनाथ सिंह की ओर से जारी किया गया है।
पत्र में लिखी गई है चौंकाने वाली सूचना
इसमें लिखा गया है कि अर्द्ध सरकारी संगठन, स्वायत्त संगठन जैसी इकाइयों में तैनात किए गए कर्मचारी केंद्र सरकार के कर्मचारी नहीं हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय कर्मचारियों को जो लाभ दिए जा रहे हैं, वे ऐसे स्वायत्त संगठनों पर लागू नहीं होंगे।
इस स्थिति में ऐसे लाभ देने के लिए अगर ऐसे संस्थानों में वित्तीय समस्या होती है तो इससे पूर्व केंद्र सरकार की अनुमति लेनी जरूरी होगी। इसके लिए ऐसे कर्मचारियों की केंद्रीय कर्मचारियों के साथ कई मामलों में समरूपता भी देखनी होगी।
जिन कर्मचारियों के वेतन और अन्य लाभों में समरूपता न हो, उनके लिए अधिकारियों का एक समूह गठित करना होगा, वही इस पर संस्तुति करेगा। जो स्वायत्त संस्थाएं केंद्र सरकार पर आर्थिक रूप से निर्भर नहीं हैं, उन्हें ऐसे मामलों पर केंद्र सरकार से कोई वित्तीय लाभ नहीं दिया जाएगा। जो संस्थान केंद्र सरकार पर निर्भर हैं, उन्हें इसकी अतिरिक्त लागत अपने स्तर पर उठानी होगी।