मोदी सरकार के तीन साल के कार्यकाल में हिमाचल के लिए घोषणाएं तो कई हुईं, मगर गले तक कर्ज में डूबे इस पहाड़ी सूबे के आम लोगों के अच्छे दिन अभी पूरी तरह से नहीं आ सके हैं।
सत्ता में आने के कुछ वक्त बाद केंद्र सरकार ने हिमाचल के लिए विशेष श्रेणी राज्य की कुछ सुविधाएं बहाल जरूर कीं, पर ये राज्य कंगाली से नहीं उबर पाया है। राजधानी शिमला को हवाई सेवाओं से जोड़ने के अलावा कोई भी बड़ा काम जमीन पर उतरा नहीं दिख रहा है।
केंद्रीय भाजपा सरकार का हिमाचल की कांग्रेस सरकार से सियासी समीकरण फिट नहीं बैठना भी इसका कारण माना जाता रहा है। चाहे चार दर्जन से ज्यादा नेशनल हाइवे की घोषणा हो या फिर बेहतरीन इलाज को एम्स खोलने की।
मोदी सरकार की ये बड़ी घोषणाएं भी नहीं हो पाई हैं पूरी
घोषणा के बावजूद धर्मशाला को स्मार्ट सिटी बनाना भी अभी कोसों दूर है। आयात शुल्क बढ़ाने की चुनाव से पहले की अपनी घोषणा के विकल्प के तौर पर हिमाचल के फलों को कोल्ड ड्रिंक में खपाने की पीएम मोदी की घोषणा पर भी अभी तक कंपनियों से कोई समझौता नहीं हुआ।
मोदी सरकार ने हिमाचल के लिए स्मार्ट सिटी, आईआईएम, एम्स, सोलर पार्क, चार दर्जन से ज्यादा नेशनल हाइवे जैसे प्रोजेक्टों की हिमाचल के लिए घोषणाएं कीं। हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज का शिलान्यास भी हुआ। ये सभी योजनाएं अभी अधूरी हैं।
धर्मशाला में केंद्रीय विश्वविद्यालय भी जरूर खुला है, मगर अभी इसकी पूरी तरह से स्थापना में वक्त लगेगा। केंद्र सरकार के पहले आम बजट में 10 जुलाई 2014 को हिमाचल को आईआईएम का तोहफा दिया। इसकी कक्षाएं एक निजी भवन में लगी हैं।
इसी बजट में रेणुका बांध को केवल 50 करोड़ रुपये दिए। इसके पीछे भी असल मकसद यहां से दिल्ली की पेयजल जरूरत को पूरा करना था। लाहौल स्पीति जिले में बड़े सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट लगाने एलान भी हुआ। जो जमीन पर नहीं बना।
और ये घोषणाएं तो अभी कागजों में ही हैं
28 फरवरी 2015 को मोदी सरकार ने दूसरे आम बजट में यहां एम्स की घोषणा की। पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के गृह क्षेत्र बिलासपुर में एम्स खोलने की इस घोषणा की अधिसूचना तक जारी नहीं हुई है। तीसरे सालाना बजट में 29 फरवरी 2016 को प्रदेश के लिए कोई अलग प्रावधान नहीं था।
चार एनएच की घोषणा पर कागजों में योजना
बाद में केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने हिमाचल आकर करीब चार दर्जन एनएच की जरूर घोषणा की। ये परियोजनाएं भी कागजों में ही हैं। हालांकि, भाजपा इसके लिए प्रदेश की कांग्रेस सरकार को वक्त पर डीपीआर न बनाने के लिए जिम्मेवार ठहरा रही है।
सभी जिलों में डायलिसिस सुविधा नहीं हुई शुरू
तीसरे आम बजट में सभी जिलों में गुर्दे के मरीजों के लिए डायलिसिस सुविधा शुरू करने की घोषणा हुई। ये भी अभी अमल में नहीं आई। एक फरवरी 2017 को मोदी सरकार ने अपने चौथे आम बजट में भी हिमाचल को अलग से कुछ खास नहीं दिया गया। भारत सरकार ने पड़ोसी राज्य जम्मू-कश्मीर को हाल में 500 करोड़ का विशेष बागवानी पैकेज दिया है। इसमें भी हिमाचल की अनदेखी हुई है।
हिमाचल के संदर्भ में तो केवल जुमले ही रहे : कांग्रेस
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि मोदी सरकार की तमाम घोषणाएं हिमाचल के संदर्भ में जुमले के अलावा कुछ नहीं रही है। हवाई सेवाओं को शुरू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेश थे। इसका लाभ आम आदमी को नहीं मिल पाया है। केंद्र सरकार की ओर से नेशनल हाइवे की अधिसूचना को ठीक करें। इसमें 61 हाइवे हैं।
हिमाचल के लिए कई संस्थान मिले, एनएच भी : सत्ती
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने कहा है कि मोदी सरकार ने हिमाचल के लिए बहुत सी घोषणाएं की हैं। हिमाचल के लिए विशेष श्रेणी का दर्जा घोषित किया गया। इनमें स्मार्ट सिटी, आईआईएम, एम्स, केंद्रीय विश्वविद्यालय जैसे संस्थान, सोलर पार्क, नेशनल हाइवे जैसे प्रोजेक्टों की हिमाचल के लिए घोषणाएं हुईं। प्रदेश को हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज भी मिला है। यहां से हवाई सेवाएं शुरू हुईं।