राज्य के प्रगतिशील बागवानों के प्रतिनिधिमंडल ने देश भर में ट्रकों की हड़ताल से पड़ रहे विपरीत असर का मामला बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह और कृषि मंत्री रामलाल मारकंडा से उठाया है।
बागवानों के प्रतिनिधि सचिवालय में प्रधान सचिव बागवानी संजय गुप्ता और प्रधान सचिव कृषि सचिव ओंकार शर्मा से भी मिले। सरकार से मांग की कि बागवानों के हितों की रक्षा की जाए।
ट्रकों की हड़ताल खत्म कराने को हस्तक्षेप किया जाए। प्रदेश के एक लाख परिवार बागवानी पर आश्रित हैं। वीरवार को बागवानों ने मंत्रियों को सौंपे एक ज्ञापन में कहा कि ट्रकों की हड़ताल से प्रदेश के बागवानों और किसानों को फसलें मंडियों तक पहुंचाने में परेशानी हो रही है।
बागवान साल में सिर्फ सेब की फसल ही लेते हैं। उनका साल का खर्चा भी इसी से होता है। पिछले पांच दिन से न तो बागवानों को पैकिंग सामग्री मिल रही है, न फसलें मंडियों में भेज पा रहे हैं।
हिमाचल प्रदेश फल, सब्जी एवं फूल उत्पादक संघ के अध्यक्ष हरीश चौहान ने केंद्र सरकार से मांग की है कि देश में 93 हजार ट्रक मालिकों की हड़ताल खत्म कराने को तुरंत हस्तक्षेप करें।
जिस तरह से ट्रकों की हड़ताल लंबे समय से चली है, उससे सेब और अन्य नकदी फसलों के खराब होने का संकट खड़ा हो गया है। सेब की तैयार फसल समय पर मंडियों में न पहुंचाई गई तो फसल नष्ट हो जाएगी।
वर्तमान में चालीस हजार पेटी सेब रोज मंडियों में भेजी जा रही थीं, परंतु ट्रकों की हड़ताल ने संकट खड़ा कर दिया है। जुब्बल-कोटखाई के पूर्व विधायक रोहित ठाकुर और जुब्बल कोटखाई ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मोती लाल केदारटा ने जारी
बयान में कहा कि प्रदेश के सेब बागवानों पर ट्रक हड़ताल का गलत असर पड़ा है। कें द्र और राज्य सरकार को ट्रकों की हड़ताल खत्म कराने को हस्तक्षेप करना चाहिए। हड़ताल जारी रहने से सेब की फसल तबाह हो जाएगी।