जेएंडके बारामूला में आतंकियों से लोहा लेते शहीद हुए हिमाचल के जिला सोलन की खेड़ा पंचायत के सूबेदार तारा चंद के शहीदी दिवस पर उनकी प्रतिमा का तिरस्कार किया गया है। मातृभूमि के लिए अपनी जान न्योछावर करने वाले शहीद सूबेदार की प्रतिमा को शरारती तत्वों ने रात के अंधेरे में तोड़ कर नुकसान पहुंचाया है।
इस घटना से परिजनों और क्षेत्रवासियों में भारी रोष है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। खेड़ा में राष्ट्रीय उच्च मार्ग 105 पर शहीद की प्रतिमा स्थापित है। 4 मार्च को उनके शहीदी दिवस के दिन ही शरारती तत्वों ने तोड़फोड़ की है।
शरारती तत्वों ने रात के अंधेरे में प्रतिमा को तोड़कर पहुंचाया नुकसान
परिजनों और लोगों की ओर से पुलिस शिकायत में कहा गया है कि हर साल शहीदी दिवस के दिन शहीद की प्रतिमा को श्रद्धांजलि दी जाती है। जैसे ही उनके परिजन प्रतिमा के पास श्रद्धांजलि देने गए तो देखा कि प्रतिमा से छेड़छाड़ हुई है। शहीद परिवार के पीछे उनकी पत्नी रोशनी देवी और बेटे नरेंद्र कुमार, रिंकू, अनिल कुमार और मनदीप सिंह हैं।
शहीद तारा चंद के बेटे नरेंद्र कुमार ने सरकार से मांग की है शरारती तत्वों को खोजकर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। डीएसपी साहिल अरोड़ा ने कहा कि शिकायत के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शरारती तत्वों को ढूंढने में पुलिस लगी है। शिकायत के आधार पर अज्ञात लोगों के खिलाफ तोड़फोड़ का मामला दर्ज किया है।
बारामूला में हुए थे शहीद
नरेंद्र कुमार के अनुसार कारगिल युद्ध के बाद तनावपूर्ण माहौल के दौरान उनके पिता तारा चंद की पोस्टिंग बारामूला में थी। 4 मार्च 2001 को ड्यूटी के दौरान कुछ आतंकियों ने उनके ट्रूप पर हमला बोल दिया। इस दौरान तारा चंद को गोली लगी और वह शहीद हो गए।
परिजनों को यह भी मलाल
परिजनों को मलाल है कि शहीद के परिवार से किए गए कुछ वायदे पूरे नहीं हो सके हैं। 16 साल बीत जाने पर आज तक परिवार के किसी भी सदस्य को कोई नौकरी और अन्य सहायता नहीं मिली है।
हालांकि, सरकार ने शहीद तारा चंद के नाम पर ग्राम पंचायत खेड़ा में स्कूल का नामकरण किया है, जिसे अपग्रेड भी कर दिया है। लेकिन शहीद के परिवार की कोई विशेष मदद नहीं की है।