मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट बनी आधार, कोटखाई के जल्टार में लोकेश की हत्या कर जमीन में दबा दिया था शव
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रिपोर्ट में बताया, नाबालिग को है अपराधों की समझ संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। जिले के कोटखाई के जल्टार गांव में एक मई 2024 को हुई लोकेश की हत्या के मामले के नाबालिग आरोपी के खिलाफ वयस्क की तरह सुनवाई होगी। सह-आरोपी के साथ मिलकर विधि के विवाद में फंसे नाबालिग (चिल्ड्रन-इन-कॉन्फलिक्ट-विद-लॉ) ने सुनियोजित तरीके से लोकेश को एक गुफा में ले जाकर उस पर हमला किया और बाद में शव को जमीन में दफना दिया था।
जांच में यह सामने आया कि घटना वाले दिन आरोपी और लोकेश ने अन्य लोगों के साथ शराब पी थी। इसके बाद सह-आरोपी द्वारा पैसे दिए जाने के लालच में नाबालिग ने इस जघन्य अपराध को अंजाम देने में सक्रिय रूप से सहयोग किया और शव छिपाने में भी मदद की थी। मामले की प्रारंभिक जांच के तहत इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) शिमला के चिकित्सा अधीक्षक द्वारा एक विशेष बोर्ड गठित किया था। इसमें बाल मनोवैज्ञानिक और मनोचिकित्सक भी शामिल थे।
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रिपोर्ट के अनुसार नाबालिग किसी भी मानसिक बीमारी से ग्रसित नहीं है उसका आईक्यू 92 है और वह अपराध के परिणामों को भली-भांति समझने में सक्षम है। घटना के समय आरोपी की आयु 17 वर्ष से अधिक पाई गई। जुवेनाइल जस्टिस (केयर एंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन) एक्ट 2015 की धारा 15 और रूल 3 के तहत बोर्ड ने सभी पहलुओं का बारीकी से अध्ययन किया। बोर्ड ने माना कि कानून का उद्देश्य सुधार का है लेकिन न्याय पीड़ित को भी मिलना चाहिए।
शिमला किशोर न्याय बोर्ड की प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट प्रतिभा नेगी की अदालत ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट शिमला से आवश्यक अनुमति मिलने के बाद बोर्ड के अधिनियम की धारा 18 (3) के तहत मामले को आगामी और त्वरित कार्रवाई के लिए सीधे चिल्ड्रन कोर्ट को सौंप दिया है।