शिमला। ठियोग क्षेत्र से जुड़े पॉक्सो और दुष्कर्म के मामले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड शिमला ने साक्ष्यों के अभाव और अभियोजन पक्ष द्वारा आरोप साबित न कर पाने के कारण बाल अपचारी (चाइल्ड इन कॉन्फ्लिक्ट विद लॉ) को बरी कर दिया है। बोर्ड की प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट प्रतिभा नेगी, सदस्य प्रियंका खैनेल और निरंजना कंवर की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार 16 नवंबर 2022 को पुलिस थाना ठियोग को सिविल अस्पताल ठियोग से सूचना मिली थी कि बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाली 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा को पेट दर्द की शिकायत के बाद अस्पताल लाया है। मेडिकल जांच में उसके गर्भवती होने की बात सामने आई थी। पीड़िता की माता के बयान के आधार पर पुलिस ने बाल अपचारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू की थी। अदालत में सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी माता अपने बयानों से मुकर गए। एसएफएसएल और डीएनए रिपोर्ट में भी बाल अपचारी की संलिप्तता साबित नहीं हो सकी। संवाद