यह मेला श्रावण मास के दूसरे रविवार को शुरू होकर सप्ताह भर चलता है। इस बार यह मेला 28 जुलाई से 4 अगस्त तक चलेगा। दो समुदायों में आत्मीयता और सद्भाव के प्रतीक इस मेले में हर बार की तरह इस बार भी सावन के मौसम में भगवान श्री लक्ष्मीनारायण के मंदिर में मिंजर अर्पित की गई। इसके बाद अखंड चंडी महल में भगवान रघुवीर को मिंजर चढ़ाई गई।
मुगलकाल में शाहजहां के शासनकाल में सन 1641 में राजा पृथ्वी सिंह भगवान रघुनाथ के चिन्ह चंबा लाए थे। शाहजहां ने मिर्जा साफी बेग को राजदूत के रूप में चंबा भेजा था। मिर्जा परिवार जरी और गोटे के काम में निपुण था। साफी बेग ने मिंजर को भगवान रघुनाथ के मंदिर में चढ़ाया जहां से यह परंपरा शुरू हो गई।