बेरोजगारी भत्ता लागू करने को लेकर अपनी ही सरकार को घेरने वाले परिवहन मंत्री जीएस बाली ने अब कौशल विकास भत्ते के आवंटन पर सवाल उठा दिए हैं। उन्होंने आईटीआई और नर्सिंग प्रशिक्षुओं की बजाय आठवीं और दसवीं पास युवाओं को कौशल विकास भत्ता देने की वकालत की है।
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ऐसे में चुनावी वर्ष में एक बार फिर हिमाचल सरकार और संगठन के बीच दूरियां बढ़ सकती हैं। हालांकि, बाली बेरोजगारी भत्ते पर श्रेय लेने की बजाय कांग्रेस के घोषणापत्र का वायदा पूरा करने की बात कर रहे हैं। कहते हैं कि बेरोजगारी भत्ता मेरी जागीर नहीं है, यह कांग्रेस के घोषणापत्र का वायदा है।
अमर उजाला से विशेष बातचीत में परिवहन मंत्री ने बेरोजगारी, कौशल विकास भत्ते और कंडक्टर भर्ती को लेकर बेबाकी से अपनी राय रखी। पेश हैं अमर उजाला के वरिष्ठ संवाददाता प्रखर दीक्षित से परिवहन मंत्री जीएस बाली से बातचीत के अंश :-
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सरकार कौशल विकास भत्ता दे रही, बेरोजगारी भत्ते पर विवाद क्यों?
सरकार कौशल विकास भत्ता दे रही, बेरोजगारी भत्ते पर विवाद क्यों?
कौशल विकास भत्ता किसको दिया जा रहा है, उनको जो आईटीआई और नर्सिंग कॉलेजों में ऐसी ट्रेनिंग और पढ़ाई कर रहे हैं। इससे उन्हें रोजगार मिल जाएगा। भत्ता देना ही है तो उनको दें, जो आठवीं दसवीं पास होने के बावजूद बेरोजगार हैं या कौशल विहीन हैं। मुझे लगता है कौशल विकास भत्ता देने पर मंथन जरूरी है।
बेरोजगारी भत्ते पर इतना जोर क्यों ?
बेरोजगारी भत्ता बाली की जागीर नहीं है, यह कांग्रेस पार्टी का पिछले चुनावों के दौरान किया हुआ वायदा है। इसे पूरा करना सरकार का दायित्व है। कौशल विकास भत्ता दे रहे, लेकिन उसकी जगह बेरोजगारों को फॉर्म भरने और इंटरनेट पर नौकरियों की जानकारी हासिल करने का भत्ता देने में संकोच क्यों है, यह समझ नहीं आ रहा।
पार्टी का ही एक धड़ा कह रहा है कि बेरोजगारी भत्ता दिलाने को श्रेय लेने का प्रयास कर रहे हैं?
मेरा सिर्फ एक ही उद्देश्य है कि मैं युवाओं को उनका हक दिलाऊं। रही श्रेय लेने की बात तो पार्टी में जिसे भी इसका संदेह है उसे मैं लिखकर दे देता हूं कि भत्ता दिलाने का कभी श्रेय नहीं लूंगा।
आप एलान करते हैं, लेकिन जमीन पर नहीं उतर पाते?
कई नेता अपने बच्चों को चुनाव लड़ाने की कवायद कर रहे हैं, आपकी राजनीतिक विरासत कौन संभालेगा ?
मेरे परिवार का कोई भी सदस्य राजनीति में आने का इच्छुक नहीं है। फिर भी चुनाव अभी दूर हैं और राजनीति में आने के बाद से अब तक हर बड़ा निर्णय मैंने अपने विधानसभा क्षेत्र के लोगों के बीच ही लिया है। जुलाई में मेरे जन्मदिन पर होने वाले कार्यक्रम में बड़ा एलान करूंगा।
आप एलान करते हैं, लेकिन जमीन पर नहीं उतर पाते?
ऐसा बिल्कुल नहीं है। राजीव थाली योजना का एलान किया और उसे छह महीने से भी कम समय में शुरू करवा दिया। आने वाले समय में पूरे प्रदेश में इसे लागू कराऊंगा। एचआरटीसी को लेकर भी जितने एलान किए, हर एक को पूरा किया चाहे नई बसों का बेड़ा हो या नए रूटों पर बसों का संचालन हर वायदे को पूरा किया।
आपके कार्यकाल की हर कंडक्टर भर्ती विवादों में क्यों उलझ जाती है?
कुछ लोग जानबूझकर विवाद कराते हैं। चाहूं तो मैं भी दूसरों की भर्तियों में विवाद करा सकता हूं, लेकिन मैं सकारात्मक काम करने की सोच रखता हूं, इसलिए लोगों के लाख फंसाने के बाद भी मैं अपने काम में लगा रहता हूं। लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के बाद चार हजार रुपये कमाने वाले कंडक्टरों पर सवाल उठ रहे हैं, लेकिन बिना किसी नीति के भर्ती हुए लोगों को रेगुलर कर अठारह हजार रुपये तनख्वाह देने पर सवाल क्यों नहीं उठते।
प्रदेश में होने वाले अगले चुनाव में किसे पार्टी का चेहरा मानते हैं?
प्रदेश में होने वाले अगले चुनाव में किसे पार्टी का चेहरा मानते हैं?
पार्टी तो मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को ही चुनाव में अपना चेहरा बनाएगी, पर मुझे लगता है कि सिस्टम को सशक्त और सकारात्मक रखने के लिए नियंत्रण रखना जरूरी होता है। अगर नियंत्रण रखने में दिक्कत हो तो बदलाव के बारे में सोचा जाता है।
31 मार्च को आप अपनी संपत्ति का खुलासा करेंगे, मुख्यमंत्री और अन्य नेताओं से क्या अपेक्षा रखते हैं?
मैं हमेशा से पारदर्शी व्यवस्था का पक्षधर रहा हूं। इसीलिए मैं खुद बिना किसी के कहे 31 मार्च को अपनी संपत्ति का ब्योरा सार्वजनिक करूंगा। दूसरे नेताओं की जहां तक बात है तो वह उन पर निर्भर करता है कि वे सार्वजनिक करना चाहते हैं या नहीं। मैं किसी पर अपनी मर्जी नहीं थोपना चाहता पर मानता हूं कि सभी को ऐसा करना चाहिए।
धर्मशाला के दूसरी राजधानी के एलान पर क्या कहेंगे?
मैं पहले भी धर्मशाला स्थित सचिवालय में बैठता था और लोगों से मिलता था। एलान का स्वागत है, पर इसे सख्ती से लागू किया जाए तो अच्छा रहेगा, ताकि लोगों को फायदा मिल सके।