हिमाचल में मैक्सिको और अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर में पाए जाने वाले उत्पादों की खेती की जाएगी। इसका ट्रायल सफल रहा है। प्रदेश में मैक्सिको का एवोकेडो और अफगानिस्तान-पाकिस्तान बॉर्डर में पाए जाने वाले हींग की खेती की जाएगी। घुमारवीं में सफल ट्रायल के बाद किसानों के लिए विदेश से बीज मंगवा लिया गया है। ट्रायल के लिए किसानों को कॉफी के पौधे भी दिए जाएंगे।
कॉफी, हींग, एवोकेडो की खेती के लिए सब हिमालय रेंज की जलवायु उपयुक्त पाई गई है। यह जानकारी शनिवार को बिलासपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय भारत सरकार के कॉफी बोर्ड के सदस्य डॉ. विक्रम शर्मा ने दी। डॉ. शर्मा ने बताया कि अभी तक मैक्सिको में उगाए जाने वाले एवोकेडो पौधे (मक्खन फल) से तेल निकलता है, जिसमें कई रोगों से लड़ने की शक्ति होती है।
300 से 400 रुपये प्रति किलो हैं एवोकेडो के दाम
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय भारत सरकार के कॉफी बोर्ड के सदस्य डॉ. विक्रम शर्मा पत्रकारों से बातचीत करते हुए।
- फोटो : अमर उजाला
एवोकेडो का थोक भाव 300 से 400 रुपये प्रति किलो है। भारत में अभी तक तमिलनाडू व पुणे में इसके फार्म हैं। उन्होंने बताया कि सब हिमालय रेंज को एग्री फोरेस्ट्री व एग्रो हॉर्टीकल्चर के तहत विकसित किया जाएगा।
एग्री फोरेस्टरी व एग्रो हॉर्टीकल्चर फसलों को बंदरों व जंगली जानवरों से भी खतरा नहीं होगा। इन कामर्शियल फसलों की मार्केट में काफी मांग है। किसान इन फसलों से अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकते हैं।
15 साल से कर रहे काम
डॉ. विक्रम शर्मा ने बताया कि पिछले 15 वर्षों से वह सब हिमालय जोन में कॉफी के सफल उत्पादन के लिए कार्य कर रहे हैं। इसके बेहतरीन परिणाम आने शुरू हो गए हैं। 15 वर्ष पहले ट्रायल के लिए उगाई गई कॉफी के बेहतर परिणाम आ गए हैं।
कर्नाटक के चिकमगनूर व असम के मौसम में उगाई जाने वाली कॉफी के लिए लोअर हिमाचल की जलवायु काफी अच्छी है। यहां कॉफी की चंद्रागिरी व एस-9 की प्रजाति काफी कामयाब हैं। बिलासपुर, ऊना, कांगड़ा व हमीरपुर के किसान कॉफी की फसल उगा रहे हैं।