राजधानी शिमला में पीने के पानी के बिल दोबारा मीटर रीडिंग के आधार पर देने की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हाईकोर्ट द्वारा दोबारा रेट निर्धारित करने की अधिसूचना को रद करने के बाद नगर निगम अधिकारियों ने यह प्रस्ताव तैयार किया है।
मीटर रीडिंग लेने और बिल बांटने के काम को आउट सोर्स करने की योजना बनाई है। 28 नवंबर को होने वाली नगर निगम की मासिक बैठक में मामला लाया जाएगा। प्रस्ताव को निगम सदन में मंजूरी नहीं मिली तो प्रशासन फ्लैट रेट को नोटिफाई करवाने के लिए मामला सरकार को भेजेगा।
निगम अभियंता विजय गुप्ता ने बताया है कि इस मामले पर अंतिम फैसला निगम सदन में होगा। नगर निगम सदन में ले जाने के लिए जल शाखा ने यह प्रस्ताव तैयार किया है। इसके तहत शहर में पुराने तरीके से मीटर रीडिंग लेकर पानी के बिल जारी किए जाएंगे।
स्टॉफ की कमी का हवाला देते हुए जल शाखा ने मीटर रीडिंग एकत्र करने और उपभोक्ताओं को बिल बांटने का काम निजी कंपनी को देने की वकालत की है। मासिक बैठक में अगर प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई तो लोगों को प्रयोग किए पानी के आधार पर ही बिल देना पड़ेगा। योजना के लागू होने से शहर में बंद पड़े पानी के मीटरों को भी बदलना पड़ेगा। इसका खर्च उपभोक्ताओं को स्वयं उठाना पड़ेगा।
दो महीने से बंद है बिल देने का काम
नगर निगम ने शहर में पानी का
घरेलू बिल देने और बिल जमा करने का काम बीते दो महीने से बंद कर दिया है।
हाईकोर्ट द्वारा पानी की दरों को दोबारा निर्धारित करने की अधिसूचना रद
होने के बाद निगम प्रशासन ने बिल देना और जमा करना बंद कर दिया है। निगम
दफ्तर में पहुंच रहे उपभोक्ताओं को कुछ दिन बाद आने की सलाह दी जा रही है।
इस हफ्ते जारी हो सकते हैं कामर्शियल बिल
कामर्शियल
कनेक्शन धारकों को पानी बिल इसी सप्ताह जारी हो सकते हैं। मामले पर विधि
शाखा ने अपनी राय दे दी है। बीते दो माह से कामर्शियल कनेक्शन वालों को भी
नगर निगम पानी के बिल जारी नहीं कर रहा है। हाईकोर्ट ने सिर्फ घरेलू पानी
बिल मामले पर अपना फैसला सुनाया था लेकिन एमसी ने कामर्शियल बिल देना बंद
कर दिया।