मीरा देवी ने बताया कि उनके तीन बच्चे हैं। बड़ा बेटा सातवीं, एक बेटी चौथी में पढ़ाई कर रही है, जबकि एक बेटी एलकेजी में पढ़ती है। बच्चों के पालन-पोषण का खर्चा बसों को धोकर निकलता है। कहती हैं कि कभी 150 तो कभी 200 रुपये दिहाड़ी बन जाती है।
बीपीएल में रखा, पर नहीं मिला कोई लाभ
पनार पंचायत ने मीरा देवी को बीपीएल परिवार की श्रेणी में रखा है, लेकिन अभी तक किसी तरह की वित्तीय सुविधा या योजनाओं का लाभ नहीं मिला है। वे बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित भी हैं।