समय सुबह 9.45 बजे। तेज कदमों से एमसीआई टीम में आए एक सदस्य इमरजेंसी एक्सरे प्लांट में पहुंचे। एक्सरे प्लांट को देखकर यकायक उनके मुंह से निकला, क्या एक्सरे प्लांट ऐसा होता है? इसका क्या हाल बनाकर रखा है?
उनके साथ चल रहे अस्पताल प्रबंधन के स्टाफ से कोई जवाब देते नहीं बना। वह झिड़की खाकर चुप हो गए। इसके बाद 9.50 बजे आपातकालीन वार्ड का हाल जानने के लिए टीम पहुंची। यहां माइनर ओटी की हालत देखकर एमसीआई के खुद पसीने छूट गए।
आपातकाल में दी जाने वाली सुविधाओं को एमसीआई ने नाकाफी बताया। यहां भी प्रबंधन के पास झिड़की सुनने के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं था।
गलती छिपाने के लिए मीडिया पर भड़के
सुबह 10. बजकर 2 मिनट पर एमसीआई के सदस्य आपातकालीन वार्ड से बाहर निकले और ट्रामा वार्ड की तरफ बढ़े। उनके साथ चल रहे अस्पताल के डाक्टरों के चेहरों पर झुंझलाहट साफ देखी जा रही थी।
ट्रामा वार्ड जो हर दम भरा रहता है, एमसीआई को दिखाने के लिए पूरे वार्ड में केवल छह मरीज लेटे थे। एमसीआई ने प्रबंधन की यह चालाकी पकड़ ली। इस बारे में जब एमसीआई ने प्रबंधन से मौके पर पूछना शुरू किया, वहीं मीडिया के छायाकारों ने फोटो लेना चाहा।
अपनी झुंझलाहट और सच छिपाने के लिए डाक्टर मीडिया पर चीख पड़े। गुस्से से बोले, सिक्योरिटी इन्हें बाहर करो, क्यों फोटो ले रहे हो? इस चीख चिल्लाहट को देख कुछ देर के लिए एमसीआई भी सन्न रह गई लेकिन जल्द ही उन्हें भी एहसास हो गया कि प्रबंधन अपनी गलती छिपाने के लिए अब मीडिया पर बरस रहा है।
और फिर बुला लिए सिक्योरिटी गार्ड
10.15 करीब एक दर्जन सिक्योरिटी गार्डों को बुला लिया गया और मीडिया को बाहर का रास्ता दिखा दिया। दोपहर साढ़े बारह बजे तक निरीक्षण का दौर चला। सभी विभागों और वार्डों में तीन सदस्य टीमें अलग-अलग गईं।
लंच के बाद फिर से निरीक्षण शुरू हुआ और शाम 5 बजकर 30 मिनट पर नेत्र विभाग का निरीक्षण हुआ। कमला नेहरू अस्पताल में भी टीम पहुंची। कॉलेज और अस्पताल में मौजूद प्राध्यापकों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती के बारे में पूरा ब्यौरा मांगा है। इसकी जांच देर रात तक चलती रही। आईजीएमसी में बन रहे नए भवनों के बारे में भी जानकारी मांगी गई।
आईजीएमसी के प्रिंसिपल प्रोफेसर एसएस कौशल ने कहा कि निरीक्षण चल रहा है। एमसीआई की ओर से जो जानकारी मांगी जा रही है उसे उपलब्ध करवाया जा रहा है।