फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पब्लिक को प्यासा छोड़ एमसी ने पीने के पानी से किया ये काम

Fri, 03 Feb 2017 09:06 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
नगर निगम ने शहर के लोगों को पानी की सप्लाई नहीं दी। गिरि परियोजना ठप होने के कारण पानी की कमी के चलते सुबह की सप्लाई में कट लगाया गया, लेकिन दूसरी ओर पब्लिक के हिस्से का पानी नगर निगम ने सड़क की धुलाई के लिए बेकार बहा दिया। वीरवार सुबह नगर निगम ने रिज मैदान से लक्कड़ बाजार की ओर जाने वाली सड़क पानी से धोकर साफ की। 
विज्ञापन


सड़क पर उड़ रही धूल मिट्टी से पब्लिक को हो रही परेशानी के मद्देनजर वीआईपी सड़क को पानी से धोने का फैसला लिया गया, लेकिन हैरत की बात यह रही की सड़क धोने के लिए नालों का पानी इस्तेमाल करने की जगह पब्लिक के हिस्से का पीने का पानी इस्तेमाल किया गया। रिज टैंक से ट्रक में पानी की टांकियां लाकर सड़क पर उड़ेल दी गईं। नगर निगम के इस कारनामे को देख कर शहर के लोग दंग रह गए। 

शहर के कुछ जागरूक लोगों ने ‘अमर उजाला’ को इसकी सूचना दी। ग्राउंड रिपोर्ट के लिए ‘अमर उजाला’ की टीम जब रिज मैदान पर पहुंची तो नगर निगम के वाटर कंट्रोल रूम के पास ट्रक में रखी लोहे की टंकियों में रिज टैंक से पानी भरा जा रहा था। टंकियां भरने के बाद ट्रक लक्कड़ बाजार की ओर मुड़ गया और पानी सड़क पर उड़ेल दिया। 
विज्ञापन


जब नगर निगम के कर्मियाें से इसकी वजह पूछी गई तो उन्होंने बताया कि अफसरों ने उन्हें ऐसे करने के आदेश दिए हैं। नगर निगम रिज टैंक से सेंट्रल जोन में पानी की सप्लाई करता है। गिरि परियोजना से पानी न आने का तर्क देकर नगर निगम ने वीरवार सुबह पब्लिक का पानी तो रोक दिया लेकिन पीने का पानी सड़क पर बहाने से गुरेज नहीं किया।
Trending Videos
विज्ञापन

बर्फबारी के बाद फिसलन को कम करने के लिए नगर निगम ने सड़क पर रेत फिंकवाई थी। बर्फ पिघलने के बाद अब सूखी रेत उड़ने से आवाजाही करने वालों को दिक्कत पेश आ रही थी। सड़क की सफाई के लिए नगर निगम को ‘ऊपर से’ भी फोन आ रहे थे। जिसके बाद रेत हटाने के लिए सड़क धोने का फैसला लिया गया। नगर निगम के अफसरों ने सड़क धोने के लिए नालों से पानी लाने की जगह शॉटकट अपनाते हुए रिज टैंक के पानी का ही इस्तेमाल कर डाला।

पार्षद भी उठा चुके हैं ग्रेटर शिमला सर्कल पर सवाल
नगर निगम के पार्षदों ने पिछले महीने आयोजित हाउस की मीटिंग में ग्रेटर शिमला वाटर एंड सीवरेज सर्कल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। पार्षदों का आरोप था कि ग्रेटर शिमला सर्कल बनने से पहले शहर में पानी के डिस्ट्रिब्यूशन और सीवरेज प्रबंधन की स्थिति काफी बेहतर थी अब व्यवस्था बिगड़ गई है। ग्रेटर शिमला सर्कल के अफसर फोन तक सुनने की जहमत नहीं उठाते।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें