फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नगर निगम शिमला के इतिहास में पहली बार सतापक्ष ने किया वॉकआउट, जमकर हंगामा

Thu, 31 May 2018 12:35 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन

नगर निगम की बैठक में पेयजल संकट और मेयर के चीन दौरे को लेकर हंगामा बरपा। कांग्रेस-माकपा पार्षदों के बवाल के आगे उप-महापौर और भाजपा पार्षद सदन छोड़ने को मजबूर हो गए। निगम के इतिहास में पहली बार सत्ता होने के बावजूद किसी पार्टी को विपक्षी पार्षदों के सामने सदन छोड़ने को मजबूर होना पड़ा।

विज्ञापन


पेयजल संकट और मेयर के चीन दौरे को लेकर बरपे हंगामे के चलते सदन महज 22 मिनट ही चल पाया। शहरी विकास विभाग के सभागार में दोपहर ठीक 12:04 मिनट पर सदन शुरू हुआ। विपक्षी पार्षद पहले ही पूरी तैयारी कर बैठे थे। जैसे ही उप महापौर राकेश शर्मा निगम आयुक्त के साथ सदन में पहुंचे कि हंगामा शुरू हो गया।

ये पार्षद सीट छोड़कर जमीन पर बैठ गए। डिप्टी मेयर ने इन्हें सीट पर बैठने को कहा। लेकिन इन्होंने नारेबाजी शुरू कर दी। पेयजल संकट के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराते हुए मेयर-डिप्टी मेयर का इस्तीफा मांगा। 12:08 मिनट तक हंगामा चला। बात नहीं बनी तो डिप्टी मेयर ने 15 मिनट के लिए सदन स्थगित कर दिया।
विज्ञापन


नहीं मानें पार्षद, बिना चर्चा किए सदन स्थगित
डिप्टी मेयर भाजपा पार्षदों के साथ सदन से बाहर चले गए। विपक्षी पार्षद नारेबाजी करते हुए इनके पीछे चल दिए। गैलरी में 15 मिनट तक नगर निगम, सरकार और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी हुई। दोपहर 12:23 मिनट पर डिप्टी मेयर फिर सदन में आए।

विपक्षी पार्षदों ने सदन में भी नारेबाजी कर दी। 12:26 मिनट पर डिप्टी मेयर ने सदन स्थगित कर दिया। नारेबाजी के बीच डिप्टी मेयर भाजपा पार्षदों को साथ लेकर यहां से चले गए। इसके बाद भी विपक्षी पार्षद सदन में हंगामा करते रहे।

विधायक के साथ पार्षदों ने किया चक्का जाम
कांग्रेसी पार्षदों ने दोपहर 12:55 मिनट पर विधायक अनिरूद्घ सिंह के साथ टॉलैंड में चक्का जाम कर दिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। जाम बढ़ने पर पुलिस के भी पसीने छूट गए। करीब आधा घंटा बाद यातायात बहाल हुआ। विधायक ने पेयजल संकट के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

साथ ही निगम की नाकामी के लिए मेयर-डिप्टी मेयर को तुरंत हटाने की मांग की। इस दौरान पार्षद दिवाकर शर्मा, राकेश चौहान, इंद्रजीत सिंह, अर्चना धवन, मीरा शर्मा, रीता ठाकुर, तनुजा चौधरी, कुसुमलता ठाकुर, रचना, शारदा चौहान, कुलदीप ठाकुर, आनदं कौशल, सिमी नंदा, सुषमा कुठियाला, शैली शर्मा भी मौजूद रहे।

हम चाहते थे सदन में होती चर्चा
हम पेयजल समस्या पर चर्चा चाहते थे। कांग्रेसी पार्षदों के पास अगर इससे निपटने के कोई सुझाव थे तो वे देते। लेकिन उन्होंने हंगामा कर दिया। पेयजल संकट के लिए कांग्रेस खुद जिम्मेदार है। पिछले 30 साल तक कांग्रेस ने सिर्फ निगम को लूटने का काम किया। शहर में पाइपलाइन ठीक करवाते, नए टैंक बनवाते तो आज ऐसा न होता। हमारी सरकार को व्यवस्था सुधारनी पड़ रही है। - राकेश शर्मा, उप-महापौर, नगर निगम शिमला

विज्ञापन

पानी का मुद्दा उठा तो खामोश हो गए भाजपा पार्षद

शहर में पानी के लिए हाहाकार मचा है लेकिन भाजपा पार्षद इस मुद्दे पर कुछ बोलने को तैयार नहीं। सदन में ये सभी मौन बैठे रहे। कच्चीघाटी से भाजपा पार्षद संजय परमार को छोड़कर किसी ने जनता की समस्या पर आवाज उठाने की हिम्मत नहीं दिखाई। पार्षद ने पानी न मिलने पर इस्तीफा देने की बात कही। वहीं, नारेबाजी कर रहे विपक्षी पार्षद बाकी भाजपा पार्षदों की चुप्पी पर हैरान थे।

कांग्रेसी पार्षद दिवाकर शर्मा, अर्चना धवन, राकेश चौहान, मीरा शर्मा ने भाजपा पार्षदों को पेयजल संकट का मुद्दा उठाने के लिए एकजुट होने को कहा लेकिन पार्षद अपनी सीट पर जमे रहे। विपक्षी पार्षदों ने कहा कि जो पार्षद पार्टी के दबाव में जनता की आवाज नहीं उठा रहे, उन्हें पार्षद पद पर रहने का अधिकार नहीं। वहीं, सदन स्थगित होने के बाद सभी भाजपा पार्षद डिप्टी मेयर के पीछे चल दिए। सदन में चर्चा की बजाय इन्होंने सचिवालय में बैठक की।

अविश्वास प्रस्ताव पर 17 पार्षद सहमत
महापौर की गैरमौजूदगी में उनके खिलाफ सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाने की कांग्रेस की तैयारियां धरी रह गई। हालांकि, प्रस्ताव पर 17 पार्षदों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा के बाकी दो पार्षद भी तैयार हैं और मेयर के शिमला पहुंचने पर उन्हें नोटिस दिया जाएगा। नियमानुसार अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले नोटिस देने के लिए 18 पार्षदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं।

कांग्रेसी पार्षदों ने पूछा कहां जा रहा पानी
पार्षद आनंद कौशल ने कहा कि कई जगह टैंकर नहीं पहुंच रहेे। वहां लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। माकपा पार्षद शैली शर्मा ने कहा कि जब तक माकपा पर दर्ज केस वापस नहीं लिया गया तब तक हाउस नहीं चलने देंगी। पार्षद सुषमा कुठियाला बोलीं कि निगम के कर्मचारी फोन नहीं उठा रहे, किसे शिकायत करें। पार्षद दिवाकर शर्मा, कुसुमलता ठाकुर, रचना, इंद्रजीत सिंह ने कहा कि आठवें दिन भी दो बाल्टी पानी मिल रहा है।

पानी का मुद्दा उठा तो खामोश हो गए भाजपा पार्षद
शहर में पानी के लिए हाहाकार मचा है लेकिन भाजपा पार्षद इस मुद्दे पर कुछ बोलने को तैयार नहीं। सदन में ये सभी मौन बैठे रहे। कच्चीघाटी से भाजपा पार्षद संजय परमार को छोड़कर किसी ने जनता की समस्या पर आवाज उठाने की हिम्मत नहीं दिखाई। पार्षद ने पानी न मिलने पर इस्तीफा देने की बात कही। वहीं, नारेबाजी कर रहे विपक्षी पार्षद बाकी भाजपा पार्षदों की चुप्पी पर हैरान थे।

कांग्रेसी पार्षद दिवाकर शर्मा, अर्चना धवन, राकेश चौहान, मीरा शर्मा ने भाजपा पार्षदों को पेयजल संकट का मुद्दा उठाने के लिए एकजुट होने को कहा लेकिन पार्षद अपनी सीट पर जमे रहे। विपक्षी पार्षदों ने कहा कि जो पार्षद पार्टी के दबाव में जनता की आवाज नहीं उठा रहे, उन्हें पार्षद पद पर रहने का अधिकार नहीं। वहीं, सदन स्थगित होने के बाद सभी भाजपा पार्षद डिप्टी मेयर के पीछे चल दिए। सदन में चर्चा की बजाय इन्होंने सचिवालय में बैठक की।

अविश्वास प्रस्ताव पर 17 पार्षद सहमत
महापौर की गैरमौजूदगी में उनके खिलाफ सदन में अविश्वास प्रस्ताव लाने की कांग्रेस की तैयारियां धरी रह गई। हालांकि, प्रस्ताव पर 17 पार्षदों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। कांग्रेस का दावा है कि भाजपा के बाकी दो पार्षद भी तैयार हैं और मेयर के शिमला पहुंचने पर उन्हें नोटिस दिया जाएगा। नियमानुसार अविश्वास प्रस्ताव लाने से पहले नोटिस देने के लिए 18 पार्षदों के हस्ताक्षर जरूरी हैं।

कांग्रेसी पार्षदों ने पूछा कहां जा रहा पानी
पार्षद आनंद कौशल ने कहा कि कई जगह टैंकर नहीं पहुंच रहेे। वहां लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। माकपा पार्षद शैली शर्मा ने कहा कि जब तक माकपा पर दर्ज केस वापस नहीं लिया गया तब तक हाउस नहीं चलने देंगी। पार्षद सुषमा कुठियाला बोलीं कि निगम के कर्मचारी फोन नहीं उठा रहे, किसे शिकायत करें। पार्षद दिवाकर शर्मा, कुसुमलता ठाकुर, रचना, इंद्रजीत सिंह ने कहा कि आठवें दिन भी दो बाल्टी पानी मिल रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें