बिना वोट दिए लौटीं बुजुर्ग महिला।
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नगर निगम चुनाव में मतदाता केंद्रों पर वोटर लिस्ट में नाम न मिलने से मतदाताओं को परेशानी भी झेलनी पड़ी। दिनभर लोग मतदाता सूचियों में अपना नाम तलाशते रहे लेकिन नाम नहीं मिले, इसके बाद कुछ लोगों को बिना वोट डाले मायूस होकर लौटना पड़ा। कुछ मतदान केंद्रों में मतदाता सूचियों में त्रुटियां थी तो कुछ जगह मिस प्रिंट के कारण उलझन की स्थिति रही। कच्चीघाटी पोलिंग बूथ संख्या 9/1 पर लोअर चक्कर से मतदान करने पहुंची 70 वर्षीय इंदू का नाम मतदाता सूची में नहीं मिला। इंदू बार-बार आग्रह करती रही की उनका नाम तलाशा जाए लेकिन बूथ स्तर अधिकारी नाम नहीं ढूंढ पाए। इंदू ने बताया कि पिछले 50 सालों से वह लगातार मतदान करती आ रही हैं, पहली बार सूची में उनका नाम नहीं मिला। पंथाघाटी मतदान केंद्र पर शक्ति बिहार से वोट डालने पहुंची हेमलता का नाम भी वोटर लिस्ट में नहीं मिला।
इस दौरान बूथ पर जमकर हंगामा हो गया। हेमलता ने कहा कि विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने वोट डाला था नगर निगम चुनाव की लिस्ट में नाम कैसे गायब हो गया। हालांकि नगर निगम के पूर्व उपमहापौर राकेश कुमार शर्मा ने स्थिति को संभाला और वोटर लिस्ट में महिला का नाम ढूंढ निकाला। एसडी स्कूल गंज बाजार बूथ पर मतदान करने पहुंचे जयचंद को पहले आर्य समाज स्कूल भेजा गया और आर्य समाज से वापिस गंज बाजार भेज दिया। कच्चीघाटी बूथ संख्या 9/2 पर वोट डालने पहुंची सरोज का नाम भी वोटर लिस्ट में नहीं था। इनकी बेटी तनीशा ने पहली बार अपने मत का प्रयोग किया लेकिन मां का नाम सूची से गायब था।
वोटर लिस्ट से नाम गायब कर छीना संवैधानिक हक
रिज मैदान पर चर्च एनेक्सी में रहने वाली मीनू प्रकाश के पूरे परिवार का नाम वोटर लिस्ट से गायब था। बारिश में छोटे बच्चे को साथ लेकर परिवार के साथ होमगार्ड कार्यालय पहुंची मीनू ने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम गायब कर हमसे संवैधानिक अधिकार छीना है। इस गड़बड़ी के लिए निर्वाचन अधिकारी की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। हमारा परिवार पिछले 37 साल से होमगार्ड कार्यालय स्थित पोलिंग बूथ पर वोट डालता आया है। विधानसभा चुनाव में भी वोट डाली थी, इस बार साजिशन सूची से नाम गायब कर दिया है।
नगर निगम, नगर पंचायतों और जिला परिषद का निर्वाचन लड़ने वाले उम्मीदवारों को परिणाम घोषित होने के एक महीने के भीतर सक्षम प्राधिकारी के पास निर्वाचन व्यय जमा कराना होगा। आयोग ने नगर निगम शिमला के निर्वाचन के लिए पांच निर्वाचन व्यय पर्यवेक्षक भी नियुक्त किए हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के सचिव सुरजीत राठौर ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं में 222 पद रिक्त हैं।
इनमें जिला ऊना में जिला परिषद सदस्य का एक पद, पंचायत समिति के 9, पंचायत प्रधान 10, उपप्रधान 13, पंचायत सदस्यों के 189 पद हैं। 222 पदों में से 130 पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ है। 130 पदों में पंचातत समिति जुब्बल का एक पद, प्रधान के दो, उपप्रधान का एक और पंचायत सदस्य के 126 पद हैं।