स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट से शिमला के बाहर होने के बाद अब अमृत मिशन पर भी खतरा मंडराने लगा है। नगर निगम अमृत मिशन से शहर में विकास की नई इबारत लिखने के दावे कर रहा था लेकिन अब एमसी के अपने हिस्से की धनराशि के जुगाड़ करने में ही हाथ पांव फूल गए हैं।
शहर के लोगों को सब्जबाग दिखाने के बाद अब अमृत मिशन के लिए 30 फीसदी हिस्सेदारी का इंतजाम करना नगर निगम के बस से बाहर हो गया है। यही कारण है कि अब नगर निगम के मेयर संजय चौहान ने मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह, शिमला के विधायक सुरेश भारद्वाज, कसुम्पटी के विधायक अनिरुद्ध सिंह, सांसद वीरेंद्र कश्यप और बिमला कश्यप को शहर के विकास की दुहाई देते हुए मदद के लिए पत्र लिखा है।
उधर विधायकों का दो टूक जवाब है कि जब नगर निगम शहर के लोगों से हाउस टैक्स और सीवरेज सेस वसूल रहा है तो अमृत मिशन के लिए एमसी शेयर का इंतजाम भी निगम को अपने स्तर पर ही करना चाहिए। अमृत मिशन के तहत नगर निगम को 31 मार्च 2016 तक 30 फीसदी तथा प्रदेश सरकार को 20 फीसदी शेयर देना है। इसके बाद ही केंद्र सरकार अपना 50 फीसदी शेयर जारी करेगी।
अमृत मिशन प्रोजेक्ट टाइम बाउंड है ऐसे में अगर नगर निगम तय समय पर अपना शेयर नहीं देता तो मिशन का हाथ से निकलना तय है। मेयर संजय चौहान ने विधायकों और सांसदों से अपनी विधायक और सांसद निधि से शिमला के विकास के लिए अमृत मिशन में शेयर उपलब्ध करवाने में सहयोग की अपील की है।
नगर निगम शिमला के महापौर संजय चौहान ने कहा कि देश के जिन नगर निगमों को अमृत मिशन के तहत लिया है वहां के माननीय सांसद और विधायक अपनी निधि से मिशन के लिए शेयर उपलब्ध करवा रहे हैं। शिमला शहर का विकास हो और यहां रहने वाले लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें इसके लिए माननीय सांसदों और विधायकों से अमृत मिशन के लिए धन उपलब्ध करवाने का अनुरोध किया है।
शिमला के विधायक सुरेश भारद्वाज ने कहा कि नगर निगम को अमृत मिशन के लिए अपने हिस्से का पैसा एमसी फंड से देना चाहिए। पानी के बिलो पर नगर निगम शहर के लोगों से 50 फीसदी सीवरेज सेस वसूल रहा है, लोग हाउस टैक्स भी दे रहे हैं, इसके बाद भी अगर नगर निगम के पास पैसा नहीं है तो यह मेयर, डिप्टी मेयर की नालायकी है। जहां तक विधायक निधि से पैसा देने का सवाल है तो संबंधित गाइड लाइंस देखने के बाद ही फैसला लेंगे।
कसुम्पटी के विधायक अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि नगर निगम लोगों से प्रापर्टी टैक्स वसूल रहा है। सीवरेज सेस भी लिया जा रहा है। ऐसे में नगर निगम को अपने हिस्से का पैसा देने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। यह मेयर, डिप्टी मेयर और कमिश्नर की लापरवाही है कि सालों से कई प्रापर्टी का किराया तक नहीं वसूला है। विधायक निधि के तौर पर साल में 50 लाख मिलते हैं, 30 पंचायतों और साढ़े पांच वार्डों में आवंटन के बाद अगर पैसा बचेगा तो दे देंगे।