प्रदेश सरकार ने वन भूमि पर कब्जों पर हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है। इसके अनुसार कब्जे के सबसे ज्यादा मामले शिमला जिले में हैं। कुल्लू दूसरे स्थान पर है। रोहड़ू में ही 10 बीघा से कम वन भूमि पर कब्जे के मामलों की संख्या 1692 है। इनमें 894 को बेदखल किया गया है। 10 बीघा से अधिक के कब्जों की संख्या 418 है। 262 मामलों में 293 हेक्टेयर से अधिक भूमि को अवैध कब्जा मुक्त किया है। अधिकारियों की ओर से दायर स्टेटस रिपोर्ट रिकॉर्ड पर न होने से मामले की सुनवाई 7 मार्च के लिए टाल दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार 15 फरवरी तक वन भूमि पर अवैध कब्जा कर बगीचे विकसित करने के कुल 13 हजार 83 मामले सामने आए। 10 बीघा से ज्यादा भूमि पर कब्जा करने के 2538 मामलों में 2526 प्राथमिकियां पुलिस थानों में दर्ज हैं। 10 बीघा से कम कब्जे की संख्या 15 फरवरी तक 10545 पाई गई। 6593 मामलों में 1340 हेक्टेयर से अधिक भूमि कब्जामुक्त करवाई है। राजस्व विभाग के अधिकारियों के समक्ष 4303 मामले दायर किए गए। इनमें 1446 में अंतिम आदेश पारित किए जा चुके हैं।
10 बीघा से ज्यादा वन भूमि कब्जाने के 2522 मामले न्यायिक दंडाधिकारियों, 1811 मामले वन मंडलाधिकारियों के समक्ष दायर किए गए। इनमें 1416 मामलों में बेदखली आदेश हुए। 933 मामलों में 867 हेक्टेयर से अधिक भूमि कब्जा मुक्त करवाई गई। शिमला में 3280, कुल्लू में 2392, कांगड़ा में 1757, मंडी 1218, चंबा में 644, सिरमौर में 540 और सोलन में 120 मामले पकड़े गए। इनमें लोगों ने 10 बीघा से कम भूमि पर अतिक्रमण किया है।
यह है मामला- कृष्ण चंद सारटा ने 2014 में मुख्य न्यायाधीश के नाम पत्र लिखकर बताया था कि लोगों ने जंगल काटकर घर, खेत और बगीचे बना लिए हैं। वन विभाग की मिलीभगत से इन्हें बिजली-पानी के कनेक्शन भी मुहैया करवाए गए हैं। कोर्ट ने पत्र पर संज्ञान लिया और वन विभाग को अवैध बगीचों को काटकर वन भूमि अवैध कब्जों से मुक्त करवाने के आदेश दिए।
आदेशों की सही अनुपालना न होने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को आदेश दिए कि वह 28 फरवरी, 2017 तक वन भूमि से सभी अवैध कब्जे हटाए। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने राजस्व विभाग के अतिरिक्त तथा प्रधान मुख्य अरण्यपाल को कोर्ट के उपरोक्त आदेशों की अनुपालना बताने को कहा। इसके बाद तीनों अधिकारी खुद कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट के साथ उपस्थित हुए थे।